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मेडिक्लेम बीमा पॉलिसी दावा अस्वीकार करना गलत

राजस्थान हाईकोर्ट

जोधपुर,मेडिक्लेम बीमा पॉलिसी दावा अस्वीकार करना गलत।राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा कि मेडिक्लेम बीमा पॉलिसी दावा अस्वीकार करना गलत है। कोर्ट ने अपने महत्वपूर्ण फैसले में चिकित्सा क्षतिपूर्ति व्यय बिलों का सत्यापन कर अनुज्ञेय सीमा के अनुरूप ब्याज़ सहित भुगतान करने के आदेश दिए गए। आपातकालीन परिस्थिति में यह आवश्यक नहीं कि कार्मिक पहले राजस्थान के सूचीबद्ध अस्पताल में इलाज कराने के लिए केरल से राजस्थान आए औऱ फिर ऑपरेशन करवाए। चिकित्सा निदेशालय में कार्यरत रजत आर की ओर से अधिवक्ता यशपाल खिलेरी ने पैरवी की। राजस्थान हाईकोर्ट वरिष्ठ न्यायाशीश अरूण मोंगा की एकलपीठ से राहत मिली।

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केरल राज्य निवासी याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता यशपाल ख़िलेरी ने रिट याचिका पेश कर बताया कि याची लिपिक पद पर चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग में पदस्थापित है औऱ 24जुलाई 2020 को विभाग से 47 दिन का उपार्जित अवकाश लेकर अपने पैतृक जन्म स्थान केरल गया औऱ उसी दरमियान उसके पेट मे भयंकर असहनीय दर्द होने पर उसे कोच्चि स्थित अस्पताल लेकर गए, जहां डॉक्टरों ने उसके पायलोप्लास्टी ऑपेरशन (किडनी से मूत्राशय में यूरिन जाने में रुकावट को ठीक करने के लिए की जाने वाली सर्जरी) की आपातकालीन जरूरत बताई। जिस पर 5 सितंबर 2020 को अस्पताल में भर्ती होकर किडनी का सफ़ल ऑपेरशन किया गया और 10 सितम्बर 2020 को अस्पताल से छुट्टी दी गई।

याची ने निर्धारित प्रारूप में सक्षम चिकित्सक का आपातकालीन स्थिति में ऑपेरशन किये जाने का शपथ पत्र पेश कर चिकित्सा क्षतिपूर्ति व्यय क्लेम राशि 1,49,289 दिए जाने के लिए क्लेम पेश किया,जिसे विभाग ने यह कहते हुए इंकार कर दिया कि उक्त ऑपेरशन मेडिकल इमरजेंसी की परिभाषा में नहीं आता है और उसने राजस्थान के पैनल हॉस्पीटल में भर्ती होकर ऑपेरशन नहीं करवाया।

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राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि पायलोप्लास्टी ऑपेरशन मेडिकल इमरजेंसी की परिभाषा में नहीं आता है ऐसे में राज्य से बाहर जाकर प्राइवेट अस्पताल में इलाज पर किये ख़र्च का पुनर्भरण नहीं किया जा सकता है। याची के अधिवक्ता ख़िलेरी ने बताया कि राज्य के चिकित्सा विभाग का व्यवहार विधि विरुद्ध और असंवैधानिक है। याची द्वारा नियमानुसार ख़र्च चिकित्सा क्षतिपूर्ति व्यय राशि दिलाने की गुहार लगाई गई।

चिकित्सा विभाग को सुने जाने और रिकॉर्ड का परिशीलन करने के पश्चात् राजस्थान हाईकोर्ट,जोधपुर के जस्टिस अरुण मोंगा की एकलपीठ ने इंकार करने के आदेश को अपास्त करते हुए याची लिपिक के मेडिकल बिलों को जांचकर निर्धारित अनुज्ञेय राशि मय ब्याज दिये जाने के अहम आदेश दिए।

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