केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री नड्डा की टीबी मुक्त भारत के लिए राजस्थान के सांसदों के साथ बैठक

  • ऐसी बैठक पिछले सप्ताह उत्तर प्रदेश,महाराष्ट्र और बिहार के सांसदों के साथ भी हुई
  • केंद्रीय मंत्री ने टीबी उन्मूलन में भारत के नेतृत्व को रेखांकित किया

नई दिल्ली(दूरदृष्टीन्यूज),केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री नड्डा की टीबी मुक्त भारत के लिए राजस्थान के सांसदों के साथ बैठक। टीबी मुक्त भारत” के लिए राजनीतिक भागीदारी को और मज़बूत करने के निरंतर प्रयास में, केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने आज संसद के चल रहे शीतकालीन सत्र के दौरान राजस्थान के सांसदों से मुलाकात की। यह सत्र विभिन्न राज्यों के सांसदों के साथ निरंतर चल रही ब्रीफिंग श्रृंखला का हिस्सा है जिसका उद्देश्य भारत में टीबी के विरुद्ध लड़ाई में सामूहिक नेतृत्व को मज़बूत करना है।

आज के सत्र में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी,केंद्रीय रेल एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू और राजस्थान का प्रतिनिधित्व करने वाले दोनों सदनों के सांसद नई दिल्ली स्थित संसद भवन एनेक्सी एक्सटेंशन में उपस्थित थे। विचार-विमर्श में टीबी, एक ऐसी बीमारी जो दुनिया भर में लाखों लोगों को प्रभावित करती है, उन्मूलन की दिशा में भारत की तेज़ प्रगति में निर्वाचित प्रतिनिधियों की केंद्रीय भूमिका पर प्रकाश डाला गया।

राजस्थान के सांसदों के नेतृत्व और भागीदारी की सराहना करते हुए नड्डा ने टीबी की जाँच और उपचार को सबके पहुँच में लाने के लिए राज्य की उपलब्धियों की सराहना की और बिना लक्षण वाले टीबी की चुनौती से निपटने के लिए निरंतर सतर्कता बरतने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने बताया कि 2015 और 2024 के बीच भारत में टीबी के मामलों में 21प्रतिशत की गिरावट आई है,जो वैश्विक दर से लगभग दोगुनी है और विश्व स्वास्थ्य संगठन की वैश्विक टीबी रिपोर्ट 2025 के अनुसार देश में अब 90प्रतिशत उपचार सफलता दर दर्ज की गई है।

मंत्री ने सांसदों से ज़िला-स्तरीय कार्रवाई को मज़बूत करने,निक्षय मित्रों को सहयोग देने और टीबी के कलंक को दूर करने तथा समय पर निदान और देखभाल सुनिश्चित करने के लिए समुदायों को संगठित करने में अग्रणी भूमिका निभाने का आग्रह किया। उन्होंने ज़ोर देकर कहा टीबी मुक्त भारत पहल इस बात का उदाहरण है कि कैसे राजनीतिक इच्छाशक्ति और जन भागीदारी मिलकर एक सदियों पुरानी जन स्वास्थ्य चुनौती का अंत कर सकते हैं।

राजस्थान के सांसदों ने स्थानीय जागरूकता अभियानों का विस्तार करने,शीघ्र पहचान के लिए निक्षय शिविर आयोजित करने और अपने निर्वाचन क्षेत्रों में टीबी हस्तक्षेपों की नियमित निगरानी सुनिश्चित करने का संकल्प लिया। उन्होंने टीबी से प्रभावित लोगों को पोषण,मानसिक और आजीविका संबंधी सहायता प्रदान करने वाली सामुदायिक पहलों को बढ़ावा देने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने सरकार की रणनीतिक प्राथमिकताओं को रेखांकित किया, जिनमें समुदाय-आधारित स्क्रीनिंग को बढ़ाना,एआई-संचालित नैदानिक ​​उपकरणों की शुरुआत और उपचार परिणामों को बेहतर बनाने के लिए पोषण-केंद्रित हस्तक्षेप शामिल हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की अतिरिक्त सचिव एवं मिशन निदेशक,आराधना पटनायक ने टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत हुई प्रगति और आगे की राह का अवलोकन प्रस्तुत किया।

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