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कट्टर ईमानदारों का बौराना बौखलाना

पार्थसारथि थपलियाल

हिंदी में दो शब्द हैं जिनका प्रयोग ना समझी के कारण पर्यायवाची या समानार्थी शब्द के रूप में कर देते हैं। ये शब्द हैं बौराया और बौखलाया। बौर आमतौर पर पौधों में फूल विकसित होने की पूर्व स्थिति होती है। जैसे आम की बौर। यह भारतीय लोक शब्द है। साहित्य में इस शब्द का अर्थ पागल है। जैसे कनक कनक ते सौगुनी मादकता अधिकाय यह पाए बौराय है,वह खाये बौराए।।

दूसरा शब्द है बौखल या बौखलाया। इस शब्द का संकेत मिलता है कि यह अरबी,फारसी से आया होगा। इसका अर्थ है किसी घटना विशेष से दुष्प्रभावित होकर पागलों जैसी हरकत करना,अंड,बंड बकना, विक्षिप्त अवस्था पैदा करना।

हमारे देश की राजनीति में भाजपा हो, कांग्रेस हो,सपा,आप हो या आप का बाप हो कई नेता ऐसे हैं जो चपरासी रखने योग्य नहीं हैं। जिनकी न दृष्टि है न सृष्टि। न चरित्र है न चेहरा। इनकी नॉन सेंस वैल्यू अतीक अहमद की तरह होती है।
काटे चाटे स्वान के दोऊ भाव विपरीत।

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एक नेता है जो दिल्ली के मुख्यमंत्री है जिन्होंने 2011 में अन्ना हजारे को छला। भ्रष्टाचार मिटाने के लिए इन्होंने नवंबर 2012 में आम आदमी पार्टी बनाई और सत्ता में आते ही प्रतिभावान चेहरों को मिटाया या बाहर होने को मजबूर किया जिनमें योगेंद्र यादव,कुमार विश्वास,शांतिभूषण, प्रशांत भूषण,विनोद कुमार बिन्नी, आशीष खेतान,किरण वेदी,शाजिया इल्मी,आशुतोष,प्रोफेसर आनंद मोहन, जनरल वीके सिंह,अजीत झा,कपिल मिश्र,राजमोहन गांधी,अलका लांबा, मयंक गांधी,अंजली दमानिया आदि प्रतिभावान नेताओं को पनपने नहीं दिया।

आप पार्टी इतनी जल्दी एक व्यक्ति की जेबी पार्टी हो जाय ऐसा किसी ने सोचा न होगा। जब इन्हें अंड बंड कहना होता है विधान सभा का सत्र बुलाकर जिसे जो अभद्र शब्द बकने हो वह बक देते हैं। यह एकालाप इसलिए होता है क्योंकि विधानसभा में कहे गए कथनों को चुनौती नही दी जा सकती। अन्यथा मानहानि का मामला बन जाय। इसे कहते हैं स्वच्छंदता। आप सरकार के दो मंत्री शराब कांड में जेल में हैं। विधानसभा में चौथी पास राजा की कहानी ऐसे सुना रहे हैं जैसे भागवत कथा में व्यास जी प्रवचन सुना रहे हों। अरे भाई, किसी उपग्रह का अन्तरिक्ष में स्थापित होने के बाद उत्तम परिणाम देना ही उद्देश्य होता है। जब उपग्रह सही परिणाम दे रहा हो तब उसकी डिजाइन में खोट निकालने का मतलब यह है कि आप विघ्नसंतोषी हैं।

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के.कामराज भारत की राजनीति में एक विलक्षण नेता थे वे चौथी पास थे। तमिलनाडु से लोकसभा में चुनकर आते थे। उनकी कामराज योजना बहुत प्रसिद्ध हुई थी। भारत की विलक्षण प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी दसवीं पास थी। इन लोगों ने बुद्धिमत्ता से ख्याति अर्जित की न कि छद्म सेकुलर बनकर। याद है दिल्ली दंगों में फरवरी 2020 में 53 लोगों की मौत हुई थी।आईबी अफसर अंकित शर्मा और उत्तराखंड के एक नौनिहाल दिलबर नेगी की हत्या हुई थी,तब दिल्ली का मुख्यमंत्री आईआई एम खड़कपुर से डिग्री प्राप्त और आई आरएस त्यक्त व्यक्ति दिल्ली का मुख्यमंत्री था। कौन कौन लोग हत्याओं में शामिल थे? खुद की डिग्रियां तिहाड़ जेल में बाल अपचारी से मालिश करवा रही हैं,भ्रष्टाचार मिटाने वाले जेल से जमानत पर बाहर नही निकल पा रहे हैं। अब अंड बंड कुछ कहना है वो कह रहे हैं। यह स्थिति बौरायेपन की है।

दूसरा शब्द बौखलाना है। इसका परम उदाहरण जम्मू-कश्मीर,गोआ और मेघालय के राजपाल सत्यपाल मालिक। हाल ही में मलिक ने कई वामपंथी विचारों के प्रसारकों को इंटरव्यू दिए। सच कहें,जो लोग सरकारी नौकरियां किये हैं उन्हें अपनी सीमाएं मालूम रहती हैं। जो आदमी राज्यपाल पद पर रहा,बल्कि राज्यपाल पद पर रहते हुए ही किसान आंदोलन में कूद पड़ा, इस व्यक्ति को राज्यपाल पद की गरिमा का भी ध्यान नही। जब 2019 में 14 फरवरी को पुलवामा हमला हुआ था उस समय श्रीमान मलिक जेएंडके के राज्यपाल थे। विधानसभा भंग थी। राज्यपाल शासन था फिर 14 फरवरी को पुलवामा में CRPF पर आतंकी हमला कैसे हो गया? श्रीमान आज आप बता रहे हैं वह जीप 10 दिनों से आस पास के गांवों में विस्फोटक के साथ घूम रही थी फिर आपने क्या किया? क्या लिंक रोड पर सुरक्षा का प्रबंध करवाया था? प्रधानमंत्री उस दिन जिमकोर्बेट नेशनल पार्क गए थे। आपका उनसे संपर्क नही हो पाया।

श्रीमान विषय तो गृहमंत्री से संबंधित था। उनसे बात करते। आप राज्यपाल थे या कुछ और.. प्रधानमंत्री या एन एसए ने जब आपको हिदायत दे दी थी फिर इस बात को मीडिया में फैलने के पीछे का उद्देश्य क्या? दरअसल में यह दिल्ली में कोठी पाने की चाल है, ताकि सुरक्षाकर्मी मिलेंगे तो अन्य सुविधाएं स्वतः मिलेंगी। यह सत्यपाल मलिक की बौखलाहट है। दोनों ही व्यक्तित्व अपने अलावा सब को भ्रष्ट मानते हैं। हम हैं कट्टर ईमानदार।
(लेखक के विचार)

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