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जोधपुर, कोरोना महामारी के चलते मक्का-मदीना का मुकद्दस सफर महंगा हो गया है। अगले साल संक्रमण से बचाव के विशेष प्रबंधों के साथ नबी के रोजे की जियारत की ख्वाहिश रखने वाले अकीदतमंदों को करीब एक लाख रुपए अधिक चुकाने पड़ेंगे। ग्रीन व अजीजिया दोनों ही श्रेणी के हज यात्रियों पर यह बोझ बढ़ेगा। नए वर्ष में हज यात्रा पर जाने वालों को तीन से सवा तीन लाख रुपए अदा करने होंगे। इसके अलावा हज यात्रियों के मक्का व मदीना में ठहराव की अवधि में भी कटौती कर दी गई है। अब हज यात्रियों को अधिक पैसे चुकाकर पहले की अपेक्षा वहां दस दिन कम ठहराया जाएगा। संक्रमण के दृष्टिगत आयु संबंधी नियम-कायदे भी लागू किए गए हैं। जाहिर है कि हज का पवित्र सफर करना मुश्किल होता जा रहा है क्योंकि अधिकांशत: जोड़े के रूप में ही हज यात्रा करने जाते हैं। राजस्थान में ज्यादातर बुजुर्ग दंपती इस सफर पर जाते हैं। ऐसे में एक परिवार को हज यात्रा के वास्ते छह लाख रुपए का प्रबंध करना होगा। इतनी राशि जुटा पाना सबके लिए आसान नहीं होगा। गौरतलब है कि पहले सब्सिडी के तौर पर 30 से 35 हजार रुपए की छूट मिलती थी। अब कई बरस से यह बंद है।

अधिक आयु आवेदक का चयन नहीं 
पहले 70 वर्ष से अधिक आयु के आवेदक को लॉटरी में शामिल किए बगैर ही उसका सीधे हज के लिए चयन किया जाता था। मगर अगले साल 18 वर्ष से कम और 65 वर्ष से अधिक आयु के आवेदक का चयन ही नहीं किया जाएगा। अब तक यात्रियों को हज के लिए 40 से 45 दिन तक वहां ठहराया जाता था। आने वाले साल में केवल 30 से 35 दिन ही ठहराया जाएगा।