कुम्भलगढ़ किले में सदियों से रह रहे आदिवासी ग्रामीणों को राहत
हाईकोर्ट ने मकानों की मरम्मत व आवश्यक निर्माण की दी अनुमति
जोधपुर(दूरदृष्टीन्यूज),कुम्भलगढ़ किले में सदियों से रह रहे आदिवासी ग्रामीणों को राहत। राजस्थान के ऐतिहासिक एवं विश्व प्रसिद्ध कुम्भलगढ़ किले के परकोटे के भीतर सदियों से निवास कर रहे ग्रामीण एवं आदिवासी परिवारों को राजस्थान हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि केवल पुरातात्विक स्मारकों की सुरक्षा के नाम पर ऐसे लोगों को, जो कई पीढिय़ों से वहां रह रहे हैं,बेदखल नहीं किया जा सकता।
कांग्रेस को जनता की नहीं गुटबाजी की चिंता: कुमावत
ग्रामीणों का आरोप था कि जब भी वे अपने पुश्तैनी मकानों की मरम्मत या आवश्यक निर्माण का प्रयास करते थे,तब पुरातत्व विभाग द्वारा एफआईआर दर्ज कराने की चेतावनी, नोटिस जारी करने तथा निर्माण कार्य रोकने जैसी कार्रवाई की जाती थी। इससे गरीब आदिवासी परिवार लंबे समय से परेशान थे। इस समस्या के समाधान के लिए ग्रामवासियों की ओर से याचिकाकर्ता विक्रम एवं अन्य ने राजस्थान उच्च न्यायालय जोधपुर में जनहित याचिका दायर की थी।
मामले की सुनवाई के बाद कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा एवं न्यायमूर्ति संजीत पुरोहित की खंडपीठ ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि जो लोग कई पीढिय़ों, यहां तक कि सदियों से उक्त क्षेत्र में निवास कर रहे हैं,उन्हें केवल पुरातत्व स्थलों की सुरक्षा के आधार पर बेदखल नहीं किया जा सकता।
न्यायालय ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि पुराने फाउंडेशन पर बने मौजूदा मकानों की मरम्मत तथा आवश्यक अतिरिक्त निर्माण की अनुमति संबंधित नियमों के अनुरूप दी जानी चाहिए। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता अजीज खांन, पिंकी बोराणा, सोनू सिंह राठौड़ एवं फरदीन खान ने प्रभावी पैरवी करते हुए ग्रामीणों का पक्ष न्यायालय के समक्ष रखा।
उच्च न्यायालय का यह निर्णय कुम्भलगढ़ किले के परकोटे में रहने वाले सैकड़ों ग्रामीण एवं आदिवासी परिवारों के लिए राहतभरा माना जा रहा है। इससे वे अपने पुश्तैनी मकानों की आवश्यक मरम्मत एवं सुरक्षित आवास का अधिकार प्राप्त कर सकेंगे।
