सुधार उत्सव एवं चिंतन शिविर 2026 संपन्न
- माउंट आबू घोषणापत्र के साथ नागरिक केंद्रित कानूनी तंत्र बनाने का संकल्प
- कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल बोले न्याय में देरी से बाधित होती है आर्थिक प्रगति
- विचारों को मापनीय परिणामों में बदलें अधिकारी
माउंट आबू(दूरदृष्टीन्यूज),सुधार उत्सव एवं चिंतन शिविर 2026 संपन्न। कानून एवं न्याय मंत्रालय के विधि मामलों के विभाग और विधायी विभाग द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित दो दिवसीय सुधार उत्सव एवं चिंतन शिविर 2026 का समापन माउंट आबू घोषणापत्र यानी संकल्प पत्र को अपनाने के साथ हुआ। यह घोषणापत्र विकसित भारत @2047 के लिए भविष्य के लिए तैयार, प्रौद्योगिकी-युक्त एवं नागरिक-केंद्रित कानूनी पारिस्थितिकी तंत्र बनाने की सामूहिक प्रतिबद्धता को दोहराता है।
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योग-ध्यान से हुई अंतिम दिन की शुरुआत
दिन की शुरुआत योग एवं ध्यान से हुई,जिसके बाद सिस्टर शैलू ने स्वपरिवर्तन से विश्वपरिवर्तन के दर्शन पर प्रेरक भाषण दिया। उन्होंने कहा कि स्थायी संस्थागत परिवर्तन खुद के परिवर्तन, सकारात्मक सोच एवं उद्देश्यपूर्ण कार्रवाई से ही शुरू होता है।
संयुक्त सुधार रोडमैप को अंतिम रूप
अभिसरण,जवाबदेही एवं साझा सुधार रोडमैप विषय पर आयोजित समापन सत्र में चार ब्रेकआउट सत्रों के परिणाम प्रस्तुत किए गए। कानूनी मामलों एवं विधायी विभाग के सचिव डॉ. राजीव मणि ने संकल्प पत्र को अपनाने का नेतृत्व किया। यह संस्थागत उत्कृष्टता,कानूनों के आधुनिकीकरण, डिजिटल परिवर्तन,तकनीक अपनाने,प्रभावी मुकदमा प्रबंधन,वैकल्पिक विवाद समाधान,क्षमता निर्माण एवं विभागीय सहयोग पर केंद्रित सुधार एजेंडा को रेखांकित करता है।
डॉ.मणि ने कहा कि चिंतन शिविर से सार्थक संवाद, सामूहिक चिंतन एवं सौहार्द को बढ़ावा मिला। उन्होंने दोनों विभागों के संस्थागत ज्ञान को दशकों में निर्मित एक मूल्यवान ज्ञान-संपदा बताया।
न्याय में देरी से अवरुद्ध होते हैं राष्ट्रीय संसाधन- मेघवाल
केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री अर्जुन राम मेघवाल ने अपने विदाई संबोधन में अधिकारियों से विचारों को मापनीय परिणामों में बदलने का आह्वान किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि विवादों का समयबद्ध समाधान राष्ट्र-निर्माण का अभिन्न अंग है क्योंकि न्याय में देरी से मूल्यवान राष्ट्रीय संसाधन अवरुद्ध हो जाते हैं एवं आर्थिक प्रगति में बाधा उत्पन्न होती है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के निरंतर आत्मचिंतन,सुधार एवं परिवर्तनकारी सोच वाले दृष्टिकोण का उल्लेख करते हुए उन्होंने सभी विभागों से एक टीम के रूप में मिलकर कार्य करने का आग्रह किया। पीएम के शब्दों को उद्धृत करते हुए उन्होंने कहा,यही सही समय है भारत का अनमोल समय है। मेघवाल ने अधिकारियों से इस अवसर का लाभ उठाकर *सार्थक एवं स्थायी कानूनी सुधारों को आगे बढ़ाने का आह्वान किया।
माउंट आबू घोषणापत्र के साथ संपन्न हुए सुधार उत्सव एवं चिंतन शिविर 2026 ने संस्थागत उत्कृष्टता,नवाचार, सहयोगात्मक शासन एवं निरंतर सुधारों को आगे बढ़ाने के लिए नया सामूहिक संकल्प दिया है।
