धूमधाम से निकली रावजी की गैर

धूमधाम से निकली रावजी की गैर

जोधपुर,धूमधाम से निकली रावजी की गैर।शहर के मंडोर में धुलण्डी पर वर्षों से माली समाज की ओर से निकलने वाली रावजी गेर इस बार भी बड़े ही धूमधाम और परम्परागत तरीके से निकली गई। रावजी की यह गेर दोपहर 3 बजे मांडावता बेरा स्थित मंदिर चौक में पूजा अर्चना के बाद रवाना होकर खोखरिया बेरा पहुंची। वहां के लोगों को साथ लेकर भियाली बेरा,गोपी का बेरा के अंदर से फूलबाग नदी होते हुए फतेहबाग संतोकजी के बेरे पर पहुंचती है।

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यहां आमली बेरा के गेर भी मौजूद रहते हैं। आमली बेरा के दो परिवार बारी-बारी से ही राव का चयन करते हैं। वर्षों से चली आ रही इस परंपरा में एक ऐसे युवक को राव बनाया जाता है जो नवविवाहित हो और अच्छी कद-काठी के साथ-साथ नाचने में भी माहिर हो। खास बात यह है कि खोखरिया बेरा से ही राव का चयन किया जाता है। वे एक युवक को चुनकर उसकी पीठ पर छापा लगाते हैं। राव तय होने के बाद उसका श्रृंगार किया जाता है।

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यहां से मंडावता चौराहा होते हुए भिंयाली बेरा,गोपी बेरा से फतेहबाग पहुंची। चंग की थाप और ढोल की धमचक के साथ गेर की टोलियां के बीच मे राव बना युवक के साथ गेरिये नृत्य और गीत गाते हुए चल रहे थे। मंडोर उद्यान के राव कुंड तक पहुंचाने में सुरक्षा की जिम्मेदारी मंडावता बेरा के लोगों की ही होती है। इन लोगों के हाथों में लाठियां व हॉकियां होती है जो राव को एक घेरा बनाकर चलती है उसे आगे ले जाते रहते हैं। मंडोर उद्यान में पहुंचते ही सबसे पहले राव उस कुंड में डुबकी लगाते हैं। उसके बाद अन्य युवक स्नान करते हैं। एक दूसरे पर पानी उछालते हुए स्नान करते हैं।

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