सेवानिवृत वरिष्ठ लिपिक को ब्याज सहित वेतन देने का आदेश
- राजस्थान सिविल सेवा अपील अधिकरण
- वन विभाग का मामला
जोधपुर(दूरदृष्टीन्यूज),सेवानिवृत वरिष्ठ लिपिक को ब्याज सहित वेतन देने का आदेश। राजस्थान सिविल सेवा अपील अधिकरण जोधपुर ने वन विभाग से सेवानिवृत वरिष्ठ लिपिक को ब्याज सहित तनख्वाह देने का आदेश पारित किया।
बीकानेर निवासी लक्ष्मण दास राठौड़ जिसका वरिष्ठ सहायक के रूप में कार्य करते हुए 10 अक्टूबर 2016 को उप वन संरक्षक स्टेज द्वितीय से उप वन संरक्षक हनुमानगढ़ स्थानांतरण किया गया। इस स्थानान्तरण आदेश से प्रताड़ित होकर उसने एक अपील अधिकरण के समक्ष प्रस्तुत की थी। 16 नवंबर 2016 को अधिकरण ने उसके स्थानांतरण आदेश पर रोक लगाते हुए विभाग से जवाब तलब किया।
अधिकरण से अंतरिम आदेश मिलने के उपरान्त अपीलार्थी ने 29 नवंबर 2016 को विभाग के समक्ष अपनी उपस्थिति प्रस्तुत की परन्तु उप वन संरक्षक स्टेज द्वितीय बीकानेर द्वारा उसको कार्यग्रहण न करवाकर उच्च अधिकारियों से मार्ग दर्शन मांगा।
अपीलार्थी द्वारा नियमित रूप से कार्यग्रहण करवाने का निवेदन करने के उपरान्त भी उप वन संरक्षक बीकानेर द्वारा उसे कार्यग्रहण नहीं करवाया गया। 22 दिसम्बर 2016 को उसके द्वारा अपने अधिवक्ता के माध्यम से एक विधिक नोटिस रजिस्टर्ड डाक द्वारा भेजने पर भी कार्यग्रहण नहीं करवाया गया। अन्त में अपीलार्थी द्वारा एक अवमानना याचिका अधिकरण के समक्ष प्रस्तुत की। अवमानना याचिका प्रस्तुत करने के पश्चात् विभाग द्वारा उसका उसका स्थानान्तरण आदेश 10 अक्टूबर 2016 को जारी किया गया था उसे आदेश 09 अक्टूबर 2017 से प्रत्याहारित कर लिया गया एवं उसे 10 अक्टूबर 2017 को कार्यग्रहण करने की अनुमति प्रदान की गई।
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कार्यग्रहण करने के पश्चात् भी अपीलार्थी ने 29 नवंबर 2016 से 10 अक्टूबर 2017 के वेतन की मांग निरन्तर रूप से करता रहा मगर विभाग द्वारा उसे स्थगन आदेश से लेकर स्थानांतरण आदेश निरस्त करने की अवधि का वेतन प्रदान नहीं किया गया। इस संदर्भ में विभाग के समक्ष अपीलार्थी द्वारा अनेकोनेक अभ्यावेदन प्रस्तुत किये गये। परन्तु विभाग द्वारा 29 नंबवर 2016 से 10 अक्टूबर 2017 तक का वेतन नहीं दिया गया।
31 जुलाई 2019 को सेवानिवृति की आयु प्राप्त करने पर उसे सेवानिवृत कर दिया गया मगर उसे उस समय का वेतन सेवानिवृति पश्चात भी नहीं दिया गया।
सेवानिवृति पश्चात अपीलार्थी द्वारा लम्बित वेतन के लिए पुन: अभ्यावेदन प्रस्तुत किये गये लेकिन विभाग द्वारा अपनी हठधर्मिता के कारण उसे वेतन नहीं दिया गया। वर्ष 2023 में विभाग द्वारा वेतन नहीं दिये जाने के कृत्य से व्यथित होकर उसने अपने अधिवक्ता प्रमेन्द्र बोहरा के माध्यम से अपील अधिकरण के समक्ष प्रस्तुत की।
अधिकरण द्वारा वन विभाग से जवाब तलब करने पर विभाग द्वारा यह तर्क दिया गया कि अपीलार्थी यदि 29 नवंबर 2016 से 10 अक्टूबर 2017 के मध्य की छूट्टियों के लिए आवेदन करे तो उसे वेतन दिया जा सकता है। क्योंकि उसके द्वारा विभाग के हाजरी रजिस्ट्रर में हस्ताक्षर नहीं होने के कारण उसे वेतन नहीं दिया जा रहा है।
इसके विपरित प्रार्थी के अधिवक्ता का अधिकरण के समक्ष यह तर्क था कि प्रार्थी को विभाग द्वारा प्रथमतया: तो अधिकरण के द्वारा पारित अन्तरिम आदेश के बावजूद कार्यग्रहण नहीं करने दिया गया इस संदर्भ में अपीलार्थी द्वारा नियमित रूप से जरिये डाक अभ्यावेदन प्रस्तुत किये गये फिर भी विभाग द्वारा उसे अवकाश संबंधित प्रार्थना पत्र देने हेतु मजबूर किया जा रहा है क्योंकि अपीलार्थी द्वारा अपनी उपस्थिति 29 नवंबर 2016 से 10 अक्टूबर 2017 के मध्य दी गई परन्तु विभाग द्वारा उसे कार्यग्रहण करने की अनुमति प्रदान नहीं की गई। अत: इसमें अपीलार्थी की कोई चूक परिलक्षित नहीं होती।
प्रार्थी अधिवक्ता के तर्कों से सहमत होते हुए अधिकरण ने अपीलार्थी द्वारा प्रस्तुत अपील को स्वीकार करते हुए उसे 29 नवंबर 016 से 10 अक्टूबर 2017 के मध्य का वेतन देने का आदेश पारित किया एवं आदेश की पालना तीन माह के भीतर करने का आदेश भी दिया साथ ही तीन माह में नहीं करने पर विभाग को 9 प्रतिशत ब्याज आदेश पारित होने की दिनांक से देने का आदेश पारित किया।
