जोधपुर, मां बेटे के वात्सल्य का प्रतीक पर्व मारवाड़ में श्रद्धा और उमंग से मनाया गया। बेटे की लंबी आयु की कामना के लिए मनाए जाने वाले इस पर्व पर माओं ने अपने बेटों के माथे पर तिलक लगाया और हाथ में मोदक देकर घर की खुशहाली की कामना की।
इस अवसर पर माताओं ने प्रचलित कथा का वाचन भी किया। सुबह से ही घरों में माताओं ने जल्दी नहाने के बाद गाय व बछड़े की पहले पूजा अर्चना की फिर अपने-अपने पुत्रों को तिलक लगाने के साथ मॉळी बांधी। इस अवसर आज घरों में चाकू से कटी फल सब्जियों से परहेज किया जाता है। ऐसे में घरों में बाजरे का सोगरा, मूंग मोठ और चना की सब्जी बनाई गई।
बछ बारस की कथा
दरअसल बछ बारस के दिन पुत्रवती महिलाएं गाय व बछड़ो का पूजन करती हैं। यदि किसी घर में गाय बछड़ा ना मिले तो गिली मिट्टी से इनकी प्रतिमा बनाकर भी उनकी पूजा कर सकती है। उन पर दही, भीगा बाजारा, आटा, घी आदि चढ़ाकर कुंमकुंम सेे तिलक लगाकर दूध चावल चढ़ाकर पूजन करना शुभ होता है। मान्यता है कि गौ माता को हरा चारा खिलाने से सारे यज्ञ करने के समान पुण्य लाभ मिलता है। सारे तीर्थ नहाने का फल प्राप्त होता है।
गौमाता के लिए कृष्ण ने अपना नाम गोपाल रखा था। प्रचलित कथानुसार भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के बाद माता यशोदा ने इसी दिन गौमाता का दर्शन व पूजन किया था। जिस गौमाता को लेकर स्वयं कृष्ण नंगे पैर जंगल जंगल फिर रहे हों और जिन्होंने अपना नाम ही गोपाल रख लिया हो उसकी रक्षा के लिए गोकूल में अवतार लिया। इस लिए गौ माता की रक्षा एवं पूजन करना हर व्यक्ति का कर्तव्य है।
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