एमजीएच बना जानलेवा बीमारी से ग्रसित युवक का जीवन रक्षक

जोधपुर(दूरदृष्टीन्यूज),एमजीएच बना जानलेवा बीमारी से ग्रसित युवक का जीवन रक्षक। महात्मा गाँधी अस्पताल जोधपुर के अधीक्षक डॉ.फतेह सिंह भाटी ने बताया कि 16 नवम्बर 2025 को तिंवरी निवासी 25 वर्षीय युवक रावल सिंह जानलेवा बीमारी टिटनेस से ग्रसित होकर महात्मा गांधी अस्पताल में भर्ती हुआ।

यहाँ भर्ती होने से पहले यह मरीज गुजरात में किसी निजी अस्पताल मे भर्ती हुआ था,लेकिन जैसा समान्यतया होता है कि जान बचने की संभावना कम थी। टिटनेस भी बेहद गंभीर और जानलेवा बीमारी है।इसमें बचने की संभावना बेहद कम होती है।साथ ही यह बेहद समय लेने वाला और खर्चीला इलाज़ है।

बीमारी की गंभीरता के कारण या लम्बे समय तक चलने वाले इलाज़ के आर्थिक बोझ के कारण यह मरीज गुजरात से राजस्थान लौट आया। यहाँ आने पर एमडीएम अस्पताल आया, जहां उसे मेडिसिन विभाग में भर्ती किया गया। बाद मे सर्जरी का रेफेरेंस होने पर ज्ञात हुआ कि उसे जानलेवा बीमारी टिटनेस है।

हारे का सहारा,श्याम हमारा की तर्ज़ पर टिटनेस या रेबीज़ जैसी जानलेवा बीमारी ज्ञात होते ही अस्पताल भले कोई भी हो मरीज़ को महात्मा गाँधी अस्पताल का रास्ता दिखाया जाता है। यह मरीज़ भी महात्मा गाँधी अस्पताल रेफ़र किया गया।

अस्पताल के सर्जरी और एनेस्थीशिया विभाग ने इस चुनौती को स्वीकार किया। सर्जरी की यूनिट एफ़ के इंचार्ज़ डॉ.ललित किशोर गर्ग ने अपनी यूनिट मे भर्ती किया। भर्ती करने के साथ ही अपनी पूरी टीम डॉ.लखन,डॉ.सोहन,रेजीडेंट डॉ. आशीष,डॉ.विशाल सहित समस्त नर्सिंग अधिकारियों और पैरामेडिकल स्टाफ को इसे चुनौती के रूप मे स्वीकार करने का कहा।

चिकित्सकों ने अपना चिकित्सकीय कौशल दिखाया,तो नर्सिंग और पैरामेडिकल स्टाफ चिकित्सा मे सहयोग के साथ मरीज़ की सेवा मे जुट गए,एनेस्थीशिया विभाग की टीम ने वेंटिलेटर और श्वसन तन्त्र को संभालने में अपने कौशल और अनुभव को उपयोग मे लिया। लगभग 15 दिन तक वेंटिलेटर पर जीवन और मृत्यु के बीच जूझता रहा। यह ऐसा समय था जब पल पल मरीज़ के परिजनों और चिकित्सकों के लिए परीक्षा की घड़ी था।मरीज़ के साथ ही दोनों की सांसें ऊपर नीचे हो रही थी।

एमडीएमएच में मनाया ध्यान दिवस

वेंटिलेटर हटने के बाद भी चिंता पूर्ण रूप से ख़त्म नहीं हुई, लेकिन आशा की हल्की किरण दिखने लगी थी कि इतनी मेहनत से यहाँ तक पहुंचे हैं और नियति ने सहयोग किया है, परमसत्ता ने आशीर्वाद दिया है, बीमार ने हिम्मत रखी है तो हम निश्चित ही सफल होंगे।इसी आस मे दिनरात मरीज़ कि सेवा मे जुटे रहे। अंततः 31 दिन बाद पूर्ण स्वस्थ होने पर मरीज़ को डिस्चार्ज करके घर भेज दिया गया।

डॉ ललित किशोर ने बताया कि पूर्व में भी दो ऐसे गंभीर रोगियों को उनकी यूनिट में भर्ती करने के बाद महीनों तक चिकित्सा एवं सेवा के बाद रोग मुक्त होने पर घर भेजा गया। सर्जरी की अन्य यूनिटों द्वारा भी इस गंभीर बीमारी से पीड़ित कई मरीजों को भर्ती करके ठीक होने पर घर भेजा गया हैं।

ऐसे गंभीर रोगी के डिस्चार्ज होकर घर जाने पर डॉ.सम्पूर्णानन्द मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य एवं नियंत्रक डॉ.बीएस.जोधा ने सर्जरी, एनेस्थीशिया विभाग एवं महात्मा गाँधी अस्पताल प्रशासन को बधाई दी। इसे प्रेरणा समझकर आगे भी ऐसी चुनौतियों को स्वीकार करते हुए इसी तरह सेवा मे जुटे रहने के लिए कहा।

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