एमजीएच को मिला पीबीएससी व थेरेप्युटिक प्लाज्माफेरेसिस का लाइसेंस
जोधपुर(दूरदृष्टीन्यूज),एमजीएच को मिला पीबीएससी व थेरेप्युटिक प्लाज्माफेरेसिस का लाइसेंस। चिकित्सा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में महात्मा गांधी अस्पताल ने एक और बड़ी कामयाबी हासिल की है। अस्पताल को अब पेरिफेरल ब्लड स्टेम सेल्स एवं थेरेप्युटिक प्लाज्माफेरेसिस की अत्याधुनिक प्रक्रियाओं के संचालन का आधिकारिक लाइसेंस प्राप्त हो गया है।
इस नई सुविधा के शुरू होने से गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को अब इलाज के लिए बड़े महानगरों की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी। इम्यूनो हीमैटोलॉजी ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन की वरिष्ठ आचार्य डॉ.राजश्री बेहरा ने बताया कि पेरिफेरल ब्लड स्टेम सेल एक ऐसी आधुनिक और सुरक्षित प्रक्रिया है, जिसके जरिए डोनर के ब्लड से स्टेम सेल्स निकाले जाते हैं। इसमें डोनर को पहले जी-सीएसएफ यानी ग्रोथ कॉलोनी स्टीमूलेटिंग फैक्टर के इंजेक्शन दिये जाते हैं,जिससे स्टेम सेल्स बोन मैरो से निकल कर पेरिफेरल ब्लड में आ जाएं। इसके बाद डोनर को अफेरेसिस मशीन से जोडकर उसका ब्लड निकाला जाता है और फिर मशीन में इस ब्लड से स्टेम सेल्स पृथक कर लिए जाते हैं। शेष ब्लड पुनः दूसरी वेन से डोनर के शरीर में वापस चला जाता है।
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इस पूरी पीबीएस कलेक्शन की प्रक्रिया में करीब 3 से 4 घण्टे का समय लगता है।यह तकनीक ब्लड कैंसर,ल्यूकेमिया,मल्टीपल मायलोमा, लिंफोमा और बोन मैरो फेलियर जैसे अप्लास्टिक एनीमिया इत्यादि गंभीर बीमारियों के इलाज में बेहद कारगर है।
डॉ.बेहरा ने बताया कि इसके साथ ही शुरू हुई थिराप्युटिक प्लाजमाफेरेसिस भी एक जीवन रक्षक प्रक्रिया है,जिसमें मरीज के ब्लड से प्लाज्मा को अलग करके निकाल दिया जाता है। इस प्लाज्मा में मौजूद हानि कारक तत्व जैसे ऑटोएंटिबॉडीज,पैराप्रोटीन एवं अन्य टॉक्सिक पदार्थों को शरीर से हटा दिया जाता है और उनकी जगह मरीज को एल्बुमिन या एफएफपी दिया जाता है।
इस प्रक्रिया में भी 3-4 घण्टे का समय लगता है। यह तकनीक थ्रॉम्बोसाइटोपेनिक थ्रॉम्बोसाइटोपेनिक परपुरा (टीटीपी),गुल्लेन बारे सिंड्रोम (जीबीएस), मियासथीनिया ग्रेविस जैसी न्यूरोलॉजिकल बीमारियों और शरीर से कुछ विशेष विषाक्त पदार्थों या दवाओं के निष्कासन में बेहद उपयोगी है।
इस सुविधा के लिए डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज प्रिंसिपल डॉ.बीएस जोधा व अधीक्षक डॉ.फतेहसिंह भाटी का विशेष सहयोग रहा। डॉ.बेहरा ने उनका आभार जताया।
