महेंद्र आसोपा हर महीने एक दिन का वेतन PM CARES को देंगे

  • मिसाल बना जोधपुर का अफसर
  • बोले देश है तो हम हैं
  • वैश्विक आर्थिक संकट में PM मोदी की मितव्ययता की अपील बनी प्रेरणा -साथी कर्मचारियों से भी की अपील
  • जो संभव हो,देश के लिए करें

जोधपुर(दूरदृष्टीन्यूज),महेंद्र आसोपा हर महीने एक दिन का वेतन PM CARES को देंगे। जब दुनिया आर्थिक अनिश्चितता के दौर से गुजर रही है,तब जोधपुर से इंसानियत और देशभक्ति की एक सुकून देने वाली खबर आई है।

जिला उपभोक्ता आयोग-प्रथम के अतिरिक्त प्रशासनिक अधिकारी महेंद्र कुमार आसोपा ने हर महीने एक दिन का मूल वेतन Prime Minister’s Citizen Assistance and Relief in Emergency Situations Fund (प्राइम मिनिस्टर्स सिटीजन असिस्टेंस एंड रिलीफ इन इमरजेंसी सिचुएशंस फंड) प्रधानमंत्री नागरिक सहायता और आपातकालीन स्थिति में राहत कोष’ फंड में देने का संकल्प लिया है।

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PM की अपील दिल को छू गई-आसोपा
आसोपा ने बताया,प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक संकट के बीच देशवासियों से मितव्ययता अपनाने की अपील की थी। वो शब्द दिल में उतर गए। सोचा देश है तो हम हैं। मेरी छोटी सी कोशिश है कि हर महीने एक दिन की तनख्वाह देश के नाम करूं। उन्होंने इसके लिए सक्षम अधिकारी के समक्ष स्वेच्छा से आवेदन देकर अनुमति मांगी है।

साथियों से भी मार्मिक अपील
आसोपा यहीं नहीं रुके। उन्होंने अपने साथी कर्मचारियों से भी विनम्र निवेदन किया,जिससे जितना संभव हो,देश के लिए करें। कोई एक दिन का वेतन दे,कोई एक कप चाय कम पिए-हर बूंद से घड़ा भरता है। उनका मानना है कि संकट की घड़ी में सरकार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा होना हर नागरिक का कर्तव्य है।

कौन हैं महेंद्र आसोपा
जोधपुर उपभोक्ता आयोग में अतिरिक्त प्रशासनिक अधिकारी के पद पर कार्यरत महेंद्र आसोपा अपने सरल स्वभाव और कर्तव्यनिष्ठा के लिए जाने जाते हैं। साथी कर्मचारी बताते हैं कि वे पहले भी कई सामाजिक कार्यों में गुपचुप मदद करते रहे हैं।

संदेश बड़ा है
आज जब महंगाई और मंदी की चर्चा हर जुबां पर है,तब एक सरकारी अधिकारी का अपनी जेब से देश के लिए हिस्सा निकालना उम्मीद जगाता है। यह खबर बताती है कि देशभक्ति नारों में नहीं, नीयत में बसती है।

निष्कर्ष
महेंद्र आसोपा का यह कदम सिर्फ एक दिन के वेतन का नहीं,भरोसे का दान है। यह बताता है कि मुश्किल वक्त में भी ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ की भावना जिंदा है। शायद इसी को कहते हैं- ‘तूफानों से कह दो,हम भी दरिया हैं’।