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रिटायर्ड एयरफोर्स अफसर ने इंक्रीमेंट के लिए 38 वर्ष किया संघर्ष

  • हाईकोर्ट ने एंड शब्द की कानूनी व्याख्या कर एरियर देने के दिए निर्देश
  • कोर्ट में खुद लड़ा केस

जोधपुर(दूरदृष्टीन्यूज),रिटायर्ड एयरफोर्स अफसर ने इंक्रीमेंट के लिए 38 वर्ष किया संघर्ष। राजस्थान हाईकोर्ट जोधपुर मुख्यपीठ ने वायुसेना में 39 साल सेवा करने वाले रिटायर्ड स्क्वाड्रन लीडर की याचिका पर अहम फैसला सुनाया है। जस्टिस विनीत कुमार माथुर और जस्टिस सुनील बेनीवाल की खंडपीठ ने यह फैसला सुनाते हुए सशस्त्र बल न्यायाधिकरण (एएफटी) की क्षेत्रीय पीठ जयपुर के मूल और रिव्यू आदेशों को रद्द कर दिया है।

हाईकोर्ट ने लेबर कोर्ट का आदेश किया रद्द

कोर्ट ने केंद्र सरकार को आदेश दिया कि वे अधिकारी को फ्लाइंग ऑफिसर के पद पर नियुक्ति के साथ दो अतिरिक्त वेतन वृद्धि (इंक्रीमेंट) का लाभ दें। साथ ही एरियर सहित सभी बकाया लाभों का भुगतान 6 महीने में करने का निर्देश दिया। जोधपुर के शांतिप्रिय नगर निवासी रिटायर्ड स्क्वाड्रन लीडर सी.सिंह (75) ने कोर्ट में अपने केस की पैरवी खुद की। याचिकाकर्ता ने 21 जनवरी 1966 को वायु सेना जॉइन की थी। करीब 22 साल एयरमैन के रूप में सेवा देने के बाद 17 दिसंबर 1988 को उन्हें फ्लाइंग ऑफिसर के पद पर कमीशन किया गया था। यहीं से वेतन विसंगति का मामला शुरू हुआ। याचिकाकर्ता सी.सिंह ने पहले इंटरनल विभाग में शिकायत की। फिर हाई कोर्ट गए। एक बार हाई कोर्ट ने वापस एयरफोर्स ट्रिब्यूनल को भेज दिया। फिर कई साल तक वहां अटका रहा। याचिकाकर्ता सी.सिंह ने लगातार फॉलो किया,तो एएफटी की जयपुर पीठ ने खारिज कर दिया और रिव्यू के लिए कहा।

बाद में उसे भी खारिज कर दिया। इसके बाद याचिका कर्ता सी.सिंह वर्ष 2022 में हाईकोर्ट डिवीजन बेंच में गए। अब करीब 38 साल बाद हाईकोर्ट का फैसले में राहत मिली। सिंह 31 अगस्त 2004 को रिटायर हुए थे।

यह थी विवाद की मुख्य वजह
विवाद की मुख्य वजह वायुसेना का नियम (एएफआई 48/75) था। इस नियम के अनुसार 8 साल से अधिक सेवा दे चुके एयरमैन को अफसर पद पर प्रमोट करने पर फॉर द पर्पज ऑफ पे ओनली यानी केवल वेतन निर्धारण के उद्देश्य से दो साल की पूर्व-तारीख की वरिष्ठता दी जानी चाहिए थी। चौथे वेतन आयोग में फ्लाइंग ऑफिसर का मूल वेतन 2500 रुपए था। नियम के मुताबिक याचिकाकर्ता का वेतन 2700 रुपए तय होना चाहिए था,लेकिन उन्हें 2500 रुपए ही दिए गए। एएफटी की जयपुर पीठ से राहत नहीं मिलने पर उन्होंने हाईकोर्ट की शरण ली।

खंडपीठ ने वायुसेना के संबंधित नियम का कानूनी विश्लेषण किया। कोर्ट ने ऑक्सफोर्ड लर्नर्स डिक्शनरी का हवाला देते हुए कहा कि नियम में इस्तेमाल किए गए अंग्रेजी शब्द एंड का अर्थ इसके अलावा या जोडऩा होता है।