आयुर्वेद विवि में लैक्टेशन इंसफिशिएंसी पर चल रहे रिसर्च प्रोजेक्ट का निरीक्षण
CCRAS टीम ने डेटा-ट्रायल की गुणवत्ता परखी
जोधपुर(दूरदृष्टीन्यूज),आयुर्वेद विवि में लैक्टेशन इंसफिशिएंसी पर चल रहे रिसर्च प्रोजेक्ट का निरीक्षण। डॉ.सर्वपल्ली राधाकृष्णन राजस्थान आयुर्वेद विश्वविद्यालय में केंद्रीय आयुर्वेद अनुसंधान परिषद (CCRAS),नई दिल्ली द्वारा स्मार्ट 2.0 योजना के तहत चल रही बहु-केंद्रीय शोध परियोजना का निरीक्षण किया गया।
किस पर हो रहा रिसर्च
परियोजना का विषय है लैक्टेशन इंसफिशिएंसी के प्रबंधन में आयुष एसएस ग्रेन्यूल्स की प्रभावशीलता एवं सुरक्षा। यानी स्तनपान में दूध की कमी की समस्या में आयुर्वेदिक ग्रेन्यूल्स कितने कारगर और सुरक्षित हैं,इस पर क्लिनिकल ट्रायल चल रहा है।
कौन आया निरीक्षण करने
निरीक्षण दल में CCRAS नई दिल्ली के वरिष्ठ सलाहकार डॉ. बीसीएस राव और MSRARI जयपुर के शोध अधिकारी डॉ. किशोर गवली शामिल थे। टीम ने परियोजना की प्रगति,अनुसंधान की कार्यप्रणाली,डेटा संग्रहण, क्लिनिकल ट्रायल और डेटा विश्लेषण से जुड़े सभी बिंदुओं का गहन मूल्यांकन किया।
कुलगुरु ने दिए निर्देश
विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो.वैद्य गोविंद सहाय शुक्ल ने भी समीक्षा की। उन्होंने अनुसंधान की गुणवत्ता,वैज्ञानिक सटीकता और पारदर्शिता बनाए रखने के निर्देश दिए।
किसने दिया प्रजेंटेशन
परियोजना की प्रमुख अन्वेषक डॉ. रश्मि शर्मा ने दल के सामने अध्ययन की वर्तमान स्थिति,प्रगति व डेटा विश्लेषण का प्रस्तुतीकरण किया। सह-प्रमुख अन्वेषक डॉ. सीमा शर्मा और वरिष्ठ अनुसंधान अध्येता डॉ. कंचन चोयल ने संचालनात्मक व तकनीकी पहलुओं की जानकारी दी।
क्या कहा निरीक्षण दल ने
टीम ने विश्वविद्यालय की रिसर्च टीम के कार्यों की सराहना की और भविष्य में और बेहतर परिणाम के लिए आवश्यक परामर्श भी दिया।
प्राचार्य का बयान
प्राचार्य प्रो.चंदन सिंह ने कहा कि यह परियोजना आयुर्वेदिक अनुसंधान को मजबूत करने के साथ मातृ स्वास्थ्य के क्षेत्र में प्रभावी समाधान देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।
निष्कर्ष
लैक्टेशन की समस्या से जूझ रही माताओं के लिए आयुर्वेदिक विकल्प तलाश रही यह परियोजना अब CCRAS की निगरानी में और तेज होगी। डेटा-आधारित नतीजे जल्द सामने आने की उम्मीद है।
