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केंद्रीय जलशक्ति मंत्री ने प्रकृति और पर्यावरण के साथ सामंजस्य बनाने पर दिया बल

नई दिल्ली, केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि प्रकृति और पर्यावरण के साथ सामंजस्य बनाते हुए हमें प्राकृतिक संसाधनों का अंधाधुंध दोहन करने से बचना होगा। लोगों को सोचना होगा कि आज अगर हमने प्राकृतिक संसाधनों का दोहन कर लिया तो हमारे बच्चे इससे वंचित रहेंगे और हमारी पी‍ढ़ी के लिए यह काफी कष्टकर होगा। पीने योग्य शुद्ध जल, सांस लेने के लिए स्वच्छ वायु और रसायन रहित मिट्टी कल्पना जैसी हो जाएगी। शुक्रवार को पर्यावरण विषय पर आयोजित एक कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री शेखावत ने कहा कि यह सोचने वाली बात है कि विश्व के अधिकांश देशों के लिए बढ़ता प्रदूषण वर्तमान में सबसे ज्वलंत समस्या है। आप लोगों ने देखा कि कोरोना के चलते लॉकडाउन में आपके शहर की हवा साफ हुई, नदियों का पानी निर्मल और अविरल हुआ, इस दौरान पर्यावरण को संजीवनी तो जरूर मिली, लेकिन अनलॉक के बाद यह स्थिति फिर बदल रही है। पर्यावरण संरक्षण की चुनौती और ज़िम्मेदारी देश के हर व्यक्ति को समझनी होगी। शेखावत ने कहा कि आप सभी जानते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पर्यावरण संरक्षण को लेकर समाज को आंदोलित करने का काम किया है। चाहे वह मन की बात हो या फिर प्रधानमंत्री का लाल किले की प्राचीर से दिया गया संबोधन। उन्होंने समय-समय पर देश को पर्यावरण संरक्षण के लिए जागरूक बनाने का काम किया। पर्यावरण संरक्षण के मुद़दे पर प्रधानमंत्री का मंत्र “चलता है”, नहीं, बल्कि बदला है, बदल रहा है, बदल सकता है, का संकल्प लेकर देश ने इसे जनांदोलन का रूप दिया है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आप लोगों को जानकर हैरानी होगी कि आज़ादी के 73 वर्षों बाद भी केवल 20 प्रतिशत जनसंख्या को उच्च गुणवत्ता का पानी उपलब्ध है। दिल्ली जैसे विकसित शहर के 40-50 प्रतिशत घरों में आरओ या दूसरे फिल्टर लगे हुए हैं। पानी की गुणवत्ता को लेकर दुनिया के 122 देशों की श्रृंखला में हम 120वें नंबर पर हैं। पर्यावरण का मुख्य हिस्सा जल भी है। इसके लिए भी प्रधानमंत्री ने गंभीरता दिखाई और जल से जुड़े सभी मुददों के लिए अलग से जलशक्ति मंत्रालय का गठन कर दिया। जलशक्ति मंत्रालय लगातार जल प्रबंधन और जल संरक्षण की दिशा में काम कर रहा है। वो चाहे अटल भूजल योजना हो या फिर जलशक्ति अभियान या जल जीवन मिशन के तहत हर घर जल के लिए नल की व्यवस्था हो या फिर देश की पवित्र गंगा नदी को अविरल और निर्मल बनाने के लिए नमामि गंगे परियोजना। शेखावत ने कहा कि आपको बताते हुए मुझे अपार हर्ष हो रहा है कि हमारी सरकार ने अब तक जितने नल कनेक्शन देश में मुहैया करवाए हैं, विश्व के 190 देश ऐसे हैं, जिनकी आबादी भी उतनी नहीं है। इनमें ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, नेपाल, घाना, श्रीलंका, जिम्बाब्वे, स्वीडन, हांगकांग, सिंगापुर, भूटान, मंगोलिया के नाम भी शामिल हैं। आज हमारे देश में 6 करोड़ 40 लाख 97 हजार 804 घरों में पीने का पानी नल से मिल रहा है।
पेड़ों की रक्षा करते हुए त्याग दिए थे प्राण
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण का विषय दशकों नहीं, बल्कि सदियों पुराना रहा है। वर्ष 1730 में राजस्थान के जोधपुर में खेजड़ली गांव के बिश्नोई समुदाय के 363 पुरुष-महिलाओं और बच्चों ने पेड़ों की रक्षा करते हुए राजा के सिपाहिओं के हाथों अपनी जान गवाईं। पर्यावरण की रक्षा के लिए किया गया यह बलिदान दुनिया के लिए प्रेरणास्रोत बना। 19वीं सदी में इसी सोच ने भारत में ‘वन सत्याग्रह’ और ‘चिपको आंदोलन’ तथा कई देशों में ‘ट्री हग्गर’ जैसे प्रकृति की रक्षा में जन आंदोलनों को मजबूती दी।

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