IIT जोधपुर बना रहा अगली पीढ़ी की फोटो-बैटरी
- IIT जोधपुर का कमाल
- अब एक ही डिवाइस में सोलर पैनल और बैटरी
- चार्जिंग की टेंशन खत्म
- बिजली बनाओ और स्टोर भी करो
- सोलर से 10 गुना ताकतवर बैटरी पर काम
- IIT जोधपुर के वैज्ञानिक बदलेंगे ऊर्जा की दुनिया
जोधपुर(दूरदृष्टीन्यूज),IIT जोधपुर बना रहा अगली पीढ़ी की फोटो- बैटरी। मोबाइल को धूप में रखो और वो खुद चार्ज हो जाए। ड्रोन बिना भारी बैटरी के घंटों उड़े। गांव का सेंसर बिना तार के सालों चले। आईआईटी जोधपुर में ये साइंस- फिक्शन अब हकीकत बन रहा है।
भौतिकी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ.शाहब अहमद की लैब ऐसी फोटो-बैटरी बना रही है जो सूरज की रोशनी से बिजली भी बनाएगी और उसी में स्टोर भी कर लेगी। अलग से सोलर पैनल और बैटरी का झंझट खत्म।
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सस्ते-सुपर सोलर सेल
मेटल हैलाइड पेरोव्स्काइट से बन रहे सोलर सेल स्याही की तरह प्रिंट होंगे। लागत कम,ताकत ज्यादा। लैब ने ‘क्वासी-डायमेंशनल’ वर्जन बनाकर इनकी सबसे बड़ी कमजोरी-जल्दी खराब होना-भी ठीक कर दी है।
10X ताकतवर बैटरी:- लिथियम-सल्फर बैटरी को कार्बन नैनोट्यूब का कवच पहनाकर ‘शटल इफेक्ट’ की बीमारी खत्म की।
नतीजा
मौजूदा बैटरी से 10 गुना ज्यादा पावर और लंबी लाइफ। साथ ही पहनने लायक फ्लेक्सिबल बैटरी पर भी काम चल रहा है।
फोटो-बैटरी,टू-इन-वन क्रांति
ये सबसे बड़ा गेमचेंजर है। एक छोटी चिप ही पैनल है और बैटरी भी। वियरेबल डिवाइस,IoT सेंसर, ड्रोन और स्पेस मिशन के लिए वरदान। वजन,लागत और कॉम्प्लेक्सिटी तीनों कम।
डॉ.अहमद कहा कि हमारा लक्ष्य सिर्फ लैब नहीं,गांव तक बिजली पहुंचाना है। ऐसी तकनीक जो सस्ती हो,स्केलेबल हो और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता खत्म करे। सोलर जनरेशन और स्टोरेज को एक करना मुश्किल है,पर यही भविष्य है।
2019 में बनी एडवांस्ड एनर्जी मटेरियल्स लैब में भौतिकी, मटेरियल साइंस और इंजीनियरिंग का संगम है।यहां बन रही तकनीक पोर्टेबल डिवाइस से लेकर ग्रिड स्टोरेज तक सब बदल सकती है। आईआईटी जोधपुर ने साफ कहा है कि ऊर्जा का भविष्य सिर्फ पैदा करना नहीं,स्मार्ट तरीके से संभालना भी है।
