राज्य के लोकसभा सांसदों के साथ समीक्षा बैठक करेंगे केंद्रीय जलशक्ति मंत्री

जल जीवन मिशन को राजनीति से नहीं,राजस्थान के भविष्य से जोड़कर देखें-शेखावत

  • केंद्रीय जलशक्ति मंत्री ने राज्य में मिशन की प्रगति को लेकर मंत्रियों, सांसदों और अधिकारियों संग की रिव्यू मीटिंग
  • बोले, हमें मिलकर और सबको साथ लेकर हर गांव-हर गरीब परिवार को नल कनेक्शन प्रदान करना है
  • ईआरसीपी पर राजस्थान के जलदाय मंत्री डॉ.जोशी जल्द जाएंगे दिल्ली, बैठकर निकाला जाएगा समाधान

जयपुर, केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने गुरुवार को जल जीवन मिशन को लेकर राजस्थान पर केंद्रित रिव्यू मीटिंग की। शेखावत ने कहा कि मुख्यमंत्री अशोक गहलोत जी से अनुरोध है कि इसे राजनीतिक दृष्टिकोण से नहीं, राजस्थान के भविष्य से जोड़कर देखें और मिशन के समय पर क्रियान्वयन को लक्षित करें। केंद्र आपके हर कदम पर पूर्ववत सभी सहयोग प्रदान करता रहेगा। हमें मिलकर और सबको साथ लेकर हर गांव-हर गरीब परिवार को नल कनेक्शन प्रदान करना है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जल जीवन मिशन का सपना हर उस भारतीय के लिए देखा है, जिसे घर में नल होना सपना लगता रहा हो।

रिव्यू मीटिंग में केंद्रीय मंत्री शेखावत ने राज्य के मंत्रियों,सांसदों और अधिकारियों से सीधे जाना कि मिशन को लेकर समस्या कहां आ रही है? शेखावत ने कहा कि पहले दिन से आज तक केंद्र राज्यों से सामंजस्य पर फोकस करता आ रहा है। इस अभियान में देश की संघीय व्यवस्था के अंतर्गत साझापन है। हर घर जल की सोच से किसी एक नेता,दल या राज्य को लाभ नहीं होना है, इससे भारत जल समृद्ध होगा। उन्होंने कहा कि सपाट कार्ययोजना के बजाय क्षेत्रवार पाइपलाइन विस्तार का मॉड्यूल बनाएं। भौगोलिक परिस्थिति के आधार पर सेप्रेट प्लानिंग की जाए।

मीटिंग के बाद मीडिया से रू-ब-रू होते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि राजस्थान को जिस गति के साथ प्रगति करनी चाहिए थी, वो नहीं कर पाया। राज्य के जलदाय मंत्री डॉ. महेश जोशी ने भी मीटिंग में स्वीकारा कि पहले दो साल जिस गति की अपेक्षा थी, हम उसके अनुरूप काम नहीं कर पाए। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि राजस्थान में एक करोड़ से ज्यादा कनेक्शन देने हैं। जब मिशन का काम शुरू हुआ था, तब राज्य राष्ट्रीय औसत से 4 प्रतिशत पीछे था, लेकिन आज 25 प्रतिशत पिछड़ गया है। 33 राज्यों में हम 29वें पायदान पर खिसक गए हैं। अगर पिछले ढाई साल में काम की प्रगति के परिप्रेक्ष्य में बात करूं तो हम 32वें पायदान पर हैं, यानी अंतिम पायदान से सिर्फ एक कदम आगे।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वर्ष 2019 से 2022 में राजस्थान सरकार को भारत सरकार की तरफ से 27 हजार करोड़ रुपए का बजट आवंटित किया जा चुका है, लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि अपनी धीमीगति की वजह से राज्य इस बजट में से सिर्फ 4 हजार करोड़ रुपए ले सका। वहीं कई राज्य ऐसे भी हैं, जिन्होंने तय बजट से अधिक इंसेंटिव प्राप्त किया है। शेखावत ने कहा कि राजस्थान को नियमों और कार्य संरचना को रिवाइज करने के लिए कहा गया है, ताकि बढ़ी कीमतों की समस्या से पार पाया जा सके। राजस्थान ने इसे रिवाइज करने का आश्वासन दिया है। राजस्थान में काम तेज गति से हो और हर घर तक पानी पहुंचे, इस दिशा में जल्द नई गाइडलाइन्स जारी की जाएंगी।

ईआरसीपी पर राजनीति नहीं, समाधान खोजना जरूरी

ईआरसीपी पर मुख्यमंत्री के रिव्यू मीटिंग में प्रस्ताव पारित करने के सवाल पर केंद्रीय मंत्री शेखावत ने कहा कि मुझे लगता है, इस प्रस्ताव की आवश्यकता नहीं है। मैंने जलदाय मंत्री डॉ. जोशी से भी कहा है कि जब तक हम इस मामले में राजनीति को नहीं छोड़ेंगे और समस्या के समाधान की दिशा में नहीं जाएंगे, तब तक कुछ नहीं हो पाएगा। ईआरसीपी केनाल बने, इसकी संकल्पना भाजपा नीत सरकार में हुई थी। भाजपा सरकार ने पार्वती-चंबल-कालीसिंध, इन तीनों नदियों को जोड़ने का जो हमारा नेशनल प्रोस्पेक्टिव प्लान का हिस्सा था, जो 31 लिंक चिह्नित किए थे, उनमें से यह एक लिंक था, जिसे एक्सटेंड करते हुए 13 जिलों की यह परियोजना बनाई थी। परियोजना को राष्ट्रीय दर्जा मिले, इसके लिए आवश्यक है कि उसमें दो लाख हेक्टेयर सिंचाई की नई क्षमता बननी चाहिए। पानी उतना नहीं था, इसलिए यह क्षमता बन नहीं रही थी, इसलिए उसको लोअर डिपेंडबिलिटी पर बना दिया गया।

कांग्रेस की सरकारों ने ही निकाले थे नोटिफिकेशन

ईआरसीपी के तकनीकी पहलुओं की चर्चा करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वर्ष 1952 से लेकर अब तक विभिन्न सरकारों ने अलग-अलग समय पर इस बात की पुनर्समीक्षा की है और जितने नोटिफिकेशन निकले हैं, वो केंद्र में कांग्रेस सरकार के समय निकले हैं। चाहे वो 1998, फरवरी 2014 या फिर उससे पहले निकले हों। सभी नोटिफिकेशन में भारत सरकार ने व्यापक स्तर पर ये तय किया था कि 75 प्रतिशत डिपेंडबिलिटी यानी चार साल में से कम से कम तीन साल पानी आएगा, उतनी डिपेंडबिलिटी हो, तभी कोई नया प्रोजेक्ट कंसीव किया जा सकेगा। अगर हम 50 प्रतिशत डिपेंडबिलिटी पर प्रोजेक्ट बनाकर भेजेंगे और फिर भारत सरकार को कहेंगे कि आप इसको मंजूर कर दो तो वो तय नियमों के अंतर्गत नहीं आता है।

ईआरसीपी को तब मिलेगा राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा:-

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि जब कोई प्रोजेक्ट अप्रूव नहीं हो रहा है और उसे राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा देने की मांग की जाए, मुझे लगता है कि इससे बाहर निकालने की जरूरत है। राजस्थान सरकार को इस पर गंभीरता से विचार करना होगा। 13 जिलों को पीने का पानी उपलब्ध कराने के लिए इस नहर पर जो उन्होंने सिंचाई की बात की है, उसको छोड़कर, इसे दो लाख हेक्टेयर सिंचाई यानी 75 प्रतिशत डिपेंडबिलिटी के अनुरूप बनाएंगे, तब भारत सरकार इसे नियमों में एडजेस्ट करके राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा दे सकती है। इस विषय में हम तत्परता से और शीघ्रता से विचार करेंगे।

ईआरसीपी पर दिल्ली में निकालेंगे समाधान

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि राजस्थान सरकार के इस एक विषय को लेकर पूरे देश के व्यापक जल संबंधों को लेकर एक नई चुनौती को खड़ा नहीं किया जा सकता है। मुझे लगता है कि राजस्थान सरकार भी इसे समझेगी। शेखावत ने कहा कि वैसे, आज तक ईआरसीपी या इन मुद्दों को लेकर राजस्थान के किसी भी मंत्री ने भारत सरकार या मेरे कार्यालय आकर मुलाकात या बात नहीं की है, लेकिन आज मैंने जलदाय मंत्री से आग्रह किया कि वे अपने अधिकारियों के साथ दिल्ली आएं और हम बैठकर चर्चा करें। इसका समाधान और सही मार्ग निकालने की दिशा में काम करें। समाधान साथ में बैठकर चर्चा करने और तकनीकी पक्षों पर विचार-विमर्श करके निकलेगा। जलदाय मंत्री ने मुझे विश्वास दिलाया है कि वे जल्दी इस विषय में दिल्ली आकर मुझसे मिलेंगे और इस पर विस्तार से बात करेंगे।

एक राज्य के लिए नहीं बदल सकते नियम

केंद्रीय मंत्री शेखावत ने कहा कि जहां तक मध्य प्रदेश की बात है तो वहां की सरकार ने खुद राजस्थान सरकार को आपत्ति दर्ज कराई है। भारत सरकार को भी आपत्ति दर्ज करवाई है कि आप 50 प्रतिशत डिपेंडबिलिटी पर राजस्थान सरकार को मंजूरी नहीं देंगे। यदि भारत सरकार ने राजस्थान सरकार को फिर भी मंजूरी दी तो मध्य प्रदेश सरकार भी 50 प्रतिशत डिपेंडबिलिटी पर प्रोजेक्ट बनाएगी। फिर राजस्थान को आज जितना पानी अभी मिल रहा है, वो भी नहीं मिल पाएगा, लेकिन ये मध्य प्रदेश का दबाव नहीं है, ये नियमों की बात है। यह वर्ष 1950 से लेकर अब तक भारत सरकार द्वारा तय फॉर्मूले की बात है, जो सभी राज्यों पर समान रूप से लागू होता है। इसके तहत 75 प्रतिशत से कम कोई प्रोजेक्ट नहीं बनाया जाएगा। इस पर कई बार पहले भी चर्चा हो चुकी है। इसलिए किसी एक राज्य को लेकर नियमों में बदलाव नहीं किया जा सकता है। मीडिया को इस विषय में राजस्थान सरकार से भी प्रश्न करने चाहिए। इस मुद्दे का राजनीतीकरण नहीं होना चाहिए।

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