आईवीएफ एवं सर्जिकल स्पर्म रिट्रीवल तकनीक से पहली बार शिशु का जन्म
- जोधपुर एम्स की उपलब्धि
- पुरुष बांझपन से जूझ रहे दंपतियों के लिए उन्नत प्रजनन उपचार से जगी नई उम्मीद
जोधपुर(दूरदृष्टीन्यूज),आईवीएफ एवं सर्जिकल स्पर्म रिट्रीवल तकनीक से पहली बार शिशु का जन्म। एम्स जोधपुर ने जन्मजात अवरोधक एज़ूस्पर्मिया के कारण पुरुष बांझपन से जूझ रहे दंपति के लिए आईवीएफ एवं सर्जिकल स्पर्म रिट्रीवल तकनीक की सहायता से शिशु का सफल जन्म सुनिश्चित किया है। संस्थान में इस तकनीक से यह पहला सफल जन्म है।
उपचार डॉ.मनु गोयल, अतिरिक्त प्रोफेसर,प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग तथा आईवीएफ विशेषज्ञ;डॉ. दीपक भिरुड,सह- प्रोफेसर,यूरोलॉजी विभाग एवं भ्रूणविज्ञानी डॉ.गिरीश की टीम ने विभागाध्यक्ष डॉ.प्रतिभा सिंह के मार्गदर्शन में सफलता पूर्वक संपन्न किया।
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डॉ.मनु गोयल ने बताया कि शल्य चिकित्सा से प्राप्त शुक्राणुओं का उपयोग आईवीएफ एवं इंट्रासाइटोप्लाज्मिक स्पर्म इंजेक्शन(आईसीएसआई) तकनीक में किया गया। इसमें एक शुक्राणु को सीधे अंडाणु में प्रविष्ट कराया जाता है। इसके बाद विकसित भ्रूण को गर्भाशय में स्थानांतरित किया गया, जिससे सफल गर्भावस्था के बाद शिशु का जन्म हुआ। माता और शिशु दोनों स्वस्थ हैं।
प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ.प्रतिभा सिंह ने कहा कि बांझपन की समस्या पुरुष या महिला,किसी एक अथवा दोनों में हो सकती है। इसलिए उचित उपचार के लिए दोनों की समय पर और समग्र जांच आवश्यक है।
यूरोलॉजी विभाग के प्रोफेसर एएस संधू एवं डॉ.दीपक भिरुड ने पुरुष बांझपन के प्रबंधन के लिए सेवाएं प्रदान कीं। इनमें सर्जिकल स्पर्म रिट्रीवल,वासोवासोस्टॉमी,माइक्रोस्कोपिक वैरिकोसेलेक्टॉमी तथा ऑर्कियोपेक्सी जैसी प्रक्रियाएं शामिल हैं।
कार्यकारी निदेशक प्रो. डॉ.डीएन शर्मा ने पूरी टीम को बधाई दी और कहा कि एम्स जोधपुर प्रजनन स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने तथा बांझपन से जूझ रहे दंपतियों को गुणवत्तापूर्ण एवं प्रमाण- आधारित उपचार उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है।
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