चोलामंडलम फाइनेंस को 15 दिन में दिलाएं कब्जा
हाईकोर्ट का नागौर एसपी और एसएचओ को आदेश
जोधपुर(दूरदृष्टीन्यूज),चोलामंडलम फाइनेंस को 15 दिन में दिलाएं कब्जा। राजस्थान हाईकोर्ट ने नागौर में बैंक की गिरवी संपत्ति का कब्जा वापस दिलाने के लिए पुलिस अधिकारियों को 15 दिन के भीतर उचित कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
हाईकोर्ट ने कहा कि जब बैंक पहले ही पुलिस की मदद से संपत्ति का कब्जा ले चुका था,तो उसके बाद उस पर दोबारा जबरन कब्जा होने की स्थिति में कानून के मुताबिक कार्रवाई की जानी चाहिए। जस्टिस नूपुर भाटी ने चोलामंडलम इन्वेस्टमेंट एंड फाइनेंस कंपनी लिमिटेड की याचिका का निस्तारण करते हुए नागौर के पुलिस अधीक्षक (एसपी) और सदर थाना प्रभारी से कहा कि वे आदेश की प्रमाणित प्रति मिलने के 15 दिनों के भीतर कानून के मुताबिक कार्रवाई करें।
अपने आदेश में हाईकोर्ट ने कहा कि कि बैंक को संपत्ति का कब्जा लेने से रोकना कानून की अवहेलना का मामला होगा। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अर्पित मेहता ने पैरवी की। मामला चोलामंडलम इन्वेस्टमेंट एंड फाइनेंस कंपनी लिमिटेड की ओर से दायर याचिका से जुड़ा है।
याचिकाकर्ता कंपनी का कहना था कि उसने नागौर जिले के बरगांव में स्थित 1,860 वर्ग फुट की आवासीय संपत्ति को गिरवी रखकर लोन दिया था। लोन की रकम वापस नहीं मिलने पर बैंक ने खाते को नॉन-परफॉर्मिंग एसेट घोषित कर दिया।
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इसके बाद सिक्योरिटाइजेशन एंड रिकंस्ट्रक्शन ऑफ फाइनेंशियल एसेट्स एंड एनफोर्समेंट ऑफ सिक्योरिटी इंटरेस्ट एक्ट, 2002 के तहत कार्रवाई शुरू की गई। बैंक के वकील ने बताया कि 6 अगस्त 2026 को पुलिस की मदद से गिरवी संपत्ति का कब्जा ले लिया गया था। बैंक का दावा था कि यह कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई थी।
ताला तोडक़र दोबारा कब्जा करने का आरोप
बैंक ने हाईकोर्ट को बताया कि 6 अगस्त 2026 को पुलिस की मदद से गिरवी संपत्ति का कब्जा लेने के बाद संबंधित लोगों ने कथित तौर पर जबरन संपत्ति में दोबारा प्रवेश किया और ताला तोडक़र कब्जा कर लिया। बैंक ने कहा कि इससे संपत्ति पर उसका कब्जा प्रभावित हुआ।
कंपनी ने इसे लेकर पुलिस से मदद मांगी, लेकिन उसे कब्जा वापस दिलाने के लिए कार्रवाई नहीं की गई। बैंक का कहना था कि कब्जा वापस लेने के लिए उसने नागौर के पुलिस अधीक्षक (एसपी) और सदर थाना प्रभारी (एसएचओ) से शिकायत कर संपत्ति का कब्जा वापस दिलाने की मांग की थी। बैंक का आरोप था कि बार-बार अनुरोध के बावजूद पुलिस ने उसकी शिकायत पर प्रभावी कदम नहीं उठाए।
बैंक ने इस स्थिति को कानून के शासन से जुड़ा मामला बताते हुए पुलिस अधिकारियों की निष्क्रियता पर सवाल उठाए। इसके बाद कंपनी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। जस्टिस नूपुर भाटी ने मामले के तथ्यों और उपलब्ध रिकॉर्ड पर विचार करने के बाद कहा कि यदि याचिकाकर्ता बैंक को संपत्ति का कब्जा लेने नहीं दिया जाता, तो यह कानून की अवहेलना का स्पष्ट मामला होगा। हाईकोर्ट ने कहा कि बैंक पहले ही संबंधित पुलिस अधिकारियों के पास शिकायत लेकर पहुंच चुका है, इसलिए अधिकारियों का दायित्व है कि वे कानून के मुताबिक कार्रवाई करें।
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