मेड़तारोड बनेगा उत्तर पश्चिम रेलवे की मेमू ट्रेनों का आधुनिक मेंटेनेंस हब
- 75.18 करोड़ की परियोजना पर काम जारी
- 48 मेमू रेकों की तैयारी में जुटा उत्तर पश्चिम रेलवे
जोधपुर(दूरदृष्टीन्यूज),मेड़तारोड बनेगा उत्तर पश्चिम रेलवे की मेमू ट्रेनों का आधुनिक मेंटेनेंस हब। उत्तर पश्चिम रेलवे अपने यात्री परिचालन को चरणबद्ध तरीके से पूर्ण विद्युत आधारित बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। इसी क्रम में जोधपुर मंडल के मेड़ता रोड स्थित डेमू शेड को 75.18 करोड़ रुपए की लागत से अत्याधुनिक मेमू अनुरक्षण हब के रूप में विकसित किया जा रहा है।
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परियोजना का कार्य प्रगति पर है और शेड को स्टेशन यार्ड से जोड़ने का विद्युतीकरण कार्य पूरा हो चुका है। इसके पूरा होने पर यह उत्तर पश्चिम रेलवे का पहला आधुनिक मेमू अनुरक्षण केंद्र होगा,जहां इलेक्ट्रिक मल्टीपल यूनिट (मेमू)रेकों का अत्याधुनिक तकनीक से अनुरक्षण किया जाएगा।
जोधपुर मंडल रेल प्रबंधक अनुराग त्रिपाठी ने बताया कि परियोजना के तहत 370 मीटर लंबी नई पिट लाइन,पूर्ण लंबाई का कवर शेड,तीन नई स्टेबलिंग लाइनें तथा आधुनिक अनुरक्षण उपकरण विकसित किए जा रहे हैं। इसके साथ ही लोको पायलटों के लिए आधुनिक प्रशिक्षण सुविधाएं भी तैयार की जाएंगी,जिससे चालक दल नई तकनीकों के अनुरूप दक्ष होगा और रेल संचालन की संरक्षा एवं गुणवत्ता में और सुधार आएगा।
वर्तमान में मेड़ता रोड डेमू शेड उत्तर पश्चिम रेलवे के प्रमुख अनुरक्षण केंद्रों में शामिल है। यहां प्रत्येक सप्ताह औसतन 16 रेकों का अनुरक्षण किया जाता है तथा उत्तर पश्चिम रेलवे की 46 डेमू रेकों का नियमित रखरखाव होता है। भीलड़ी,पालनपुर, हिसार,श्रीगंगानगर, जैसलमेर,जयपुर,चूरू,सीकर और बाड़मेर सहित विभिन्न रेलखंडों पर संचालित डेमू सेवाओं की रेकों का अनुरक्षण इसी शेड में किया जाता है।
मेड़ता रोड-मेड़ता सिटी तथा मकराना-परबतसर के बीच संचालित तीन-कोच डेमू सेवाएं भी इसी अनुरक्षण व्यवस्था का हिस्सा हैं। जोधपुर मंडल में वर्तमान में 18 डेमू रैक संचालित हैं। इनमें 12 डिब्बों वाली 5 रैक तथा 8 डिब्बों वाली 13 रैक शामिल हैं। भविष्य में मेमू सेवाओं के विस्तार के साथ इन रेलखंडों पर विद्युत चालित ट्रेनों का संचालन बढ़ाया जाएगा।
उत्तर पश्चिम रेलवे ने जोन में संचालित डेमू रेकों को चरणबद्ध तरीके से मेमू रेकों में परिवर्तित करने के लिए रेलवे बोर्ड से 48 नई मेमू रेकों की मांग की है। उम्मीद है कि ये रेक चरणबद्ध रूप से उपलब्ध कराई जाएंगी। इनके शामिल होने के बाद डेमू सेवाओं की डीजल पर निर्भरता लगभग समाप्त हो जाएगी। इससे ईंधन लागत में कमी आएगी, परिचालन अधिक किफायती होगा और कार्बन उत्सर्जन घटने से पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।
जोधपुर मंडल के वरिष्ठ मंडल यांत्रिक इंजीनियर (कैरेज एंड वैगन) अमित स्वामी ने बताया कि आधुनिक अनुरक्षण सुविधाएं विकसित होने से रेकों के रखरखाव में लगने वाला समय कम होगा, तकनीकी खराबियों में कमी आएगी और रेकों की उपलब्धता बढ़ेगी। इससे ट्रेनों का संचालन अधिक समयबद्ध और विश्वसनीय होगा तथा यात्रियों को सुरक्षित और बेहतर रेल सेवाएं मिल सकेंगी। भविष्य में बढ़ते रेल नेटवर्क की जरूरतों को पूरा करने में मेड़ता रोड अनुरक्षण हब की अहम भूमिका रहेगी।
प्रमुख बातें
-75.18 करोड़ रुपए की परियोजना पर कार्य प्रगति पर
-स्टेशन यार्ड से जोड़ने का विद्युतीकरण कार्य पूरा
-370 मीटर लंबी नई पिट लाइन का निर्माण
-तीन नई स्टेबलिंग लाइनें और आधुनिक अनुरक्षण सुविधाएं
-उत्तर पश्चिम रेलवे की 46 डेमू रेकों का अनुरक्षण मेड़ता रोड में
-सप्ताह में औसतन 16 रेकों का रखरखाव
-रेलवे बोर्ड से 48 नई मेमू रेकों की मांग
-डीजल पर निर्भरता घटेगी,पर्यावरण संरक्षण को मिलेगा बल
