वृद्धाश्रम में मनाई माता- पिता के विवाह की 52वीं वर्षगांठ
- अभिलेश वडेरा ने दिया माता-पिता सम्मान का संदेश
- अखिल भारतीय सर्वधर्म महासभा,किरण क्रांति फाउंडेशन व सिंघम स्टार म्यूजिकल ग्रुप ने मिलकर किया आयोजन -गीतसंगीत से बांधा समां
जोधपुर(दूरदृष्टीन्यूज),वृद्धाश्रम में मनाई माता-पिता के विवाह की 52वीं वर्षगांठ। जोधाणा वृद्धाश्रम में सेवा,सम्मान और स्नेह के साथ एक अनूठा आयोजन हुआ। अखिल भारतीय सर्वधर्म महासभा के प्रदेश अध्यक्ष अभिलेश वडेरा ने अपने पूज्य पिता जगदीश वडेरा एवं माता गोपी वडेरा के विवाह की 52वीं वर्ष गांठ का पावन अवसर वृद्धाश्रम के बुजुर्गों के साथ मिलकर मनाया।
गीत-संगीत से सजा कार्यक्रम
इस अवसर पर अखिल भारतीय सर्वधर्म महासभा,किरण क्रांति फाउंडेशन और सिंघम स्टार म्यूजिकल ग्रुप के तत्वावधान में कार्यक्रम आयोजित हुआ। सभी पदाधिकारियों ने गीत-संगीत की मनमोहक प्रस्तुतियाँ देकर कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। सिंघम स्टार म्यूजिक ग्रुप की लेडी रॉकस्टार योगिता टाक एवं सनसिटी रॉकस्टार अमित पेड़ीवाल व उनकी टीम ने समां बांधा। एंकरिंग विपिन लोढ़ा ने की।
शहीद मोहनसिंह सिसोदिया की 86वीं जयंती पर रक्तदान शिविर
ये थे मौजूद
कार्यक्रम में जिला अध्यक्ष रशीद खान,राष्ट्रीय महासचिव कविता श्रीवास्तव,राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. अनीता परिहार, राष्ट्रीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष मनोहर सिंह खींची,प्रदेश महासचिव मनीषा राठौड़, प्रदेश उपाध्यक्ष उषा वडेरा,प्रदेश कोषाध्यक्ष धीरेंद्र श्रीवास्तव,जिला उपाध्यक्ष मदनलाल बैद, लक्ष्मीकांत गेहलोत जिला अध्यक्ष खादी ग्रामोद्योग कांग्रेस कमेटी,हेमंत मौर्या समाज सेवी, किरण क्रांति फाउंडेशन के जिला अध्यक्ष एंकर अरुण सिंह चौहान,प्रियंका सिंह चौहान, संगीता भंडारी,कशिश देवनानी, शिल्पा नेगी,ममता भल्ला, योगिता टाक,सुनील ओझा तथा संस्कारी ग्रुप के अभिषेक शर्मा एवं उनकी टीम उपस्थित थे।
माता-पिता ईश्वर का स्वरूप हैं
इस अवसर पर अभिलेश वडेरा ने समाज,विशेषकर युवा पीढ़ी को प्रेरणादायक संदेश देते हुए कहा,माता- पिता हमारे जीवन की सबसे बड़ी पूंजी और ईश्वर का स्वरूप हैं। हमारा अस्तित्व, हमारे संस्कार और हमारी पहचान उन्हीं की देन है। इसलिए कभी भी उनका तिरस्कार न करें और उन्हें अपने घरों से दूर न करें।
उन्होंने कहा जिस प्रकार उन्होंने हमें प्रेम,त्याग और संघर्ष के साथ जीवन दिया, उसी प्रकार हमारा भी कर्तव्य है कि उनके बुढ़ापे को सम्मान,अपनापन और स्नेह से भर दें। आइए,हम सभी संकल्प लें कि अपने माता-पिता का सम्मान करेंगे, उनकी सेवा करेंगे और ऐसा समाज बनाएँगे जहाँ किसी भी माँ-बाप को वृद्धाश्रम जाने की मजबूरी न हो। माता-पिता की मुस्कान ही हमारी सबसे बड़ी सफलता और सबसे बड़ा आशीर्वाद है।
