मरीज पर कीमोथेरेपी असर करेगी या नहीं पहले ही पता चल जाएगा
- IIT जोधपुर की बड़ी खोज
- नई पीढ़ी के बायोमार्कर विकसित
जोधपुर(दूरदृष्टीन्यूज),मरीज पर कीमोथेरेपी असर करेगी या नहीं पहले ही पता चल जाएगा। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) जोधपुर के वैज्ञानिकों ने कैंसर उपचार में क्रांतिकारी कदम उठाया है। आईआई टी के शोधकर्ताओं ने नई पीढ़ी के बायोमार्कर विकसित किए हैं जो इलाज शुरू होने से पहले ही बता देंगे कि किस मरीज पर कीमोथेरेपी असर करेगी और किस पर नहीं।
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भारत में हर साल 5.9 लाख लोग कैंसर से जान गंवाते हैं। बड़ी संख्या में मरीजों में कीमोथेरेपी प्रतिरोध विकसित हो जाता है,जिससे इलाज बेअसर हो जाता है। IIT जोधपुर की Tumor Microenvironment Laboratory इस चुनौती का समाधान खोज रही है।
शोध का नेतृत्व बायोसाइंस एवं बायोइंजीनियरिंग विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ.देवेश कुमार अधरिहार कर रहे हैं। डॉ. अधरिहार ने कहा कि हम पता लगा रहे हैं कि कुछ मरीजों पर इलाज क्यों काम करता है और कुछ पर क्यों नहीं। मॉलिक्यूलर और सेलुलर कारण समझकर डॉक्टर बेहतर निर्णय ले सकेंगे।
कैसे हो रहा शोध
टीम Single-Cell Sequencing, Multicolor High- Parameter Flow Cytometry और कम्प्यूटेशनल विश्लेषण जैसी आधुनिक तकनीकों से ट्यूमर की हर कोशिका का अलग-अलग अध्ययन कर रही है। पारंपरिक तरीकों में पूरे ट्यूमर को एक साथ देखा जाता था, लेकिन Single-Cell Analysis से उन खास कैंसर कोशिकाओं की पहचान हो रही है जो कीमोथेरेपी के बाद भी जिंदा रह जाती हैं और रोग दोबारा फैलाती हैं।
Drug Repurposing से नई उम्मीद
शोध में पाया गया कि प्रतिरोधी ट्यूमर में कुछ आणविक मार्ग बहुत सक्रिय हो जाते हैं। वैज्ञानिक पहले से स्वीकृत दवाओं को कीमोथेरेपी के साथ कॉम्बिनेशन में इस्तेमाल की संभावना तलाश रहे हैं। इससे नई दवा बनाने का समय और लागत दोनों बचेंगे।
Humanized Models और Organ-on-Chip
इलाज की जांच के लिए Humanized Mouse Models और Patient- Specific Lung-on-Chip Systems बनाए जा रहे हैं। ये मॉडल मानव फेफड़ों के ऊतकों की नकल करते हैं और कैंसर,फाइब्रोसिस व सिलिकोसिस जैसी बीमारियों पर दवा का असर जांचने में मदद करेंगे। सिलिकोसिस राजस्थान के बलुआ पत्थर खनन क्षेत्रों में बड़ी समस्या है।
क्या होगा फायदा
इस शोध से डॉक्टर हर मरीज के लिए सही दवा चुन सकेंगे। अनुपयुक्त इलाज से बचकर मरीज का समय,पैसा और शारीरिक- मानसिक कष्ट कम होगा।
डॉ.अधरिहार बोले हमारा लक्ष्य है कि हर कैंसर रोगी को वही इलाज मिले जिससे उसे सबसे ज्यादा फायदा हो। पहले से पता चल जाए कि इलाज काम करेगा या नहीं,तो हजारों मरीजों की जान बच सकती है।
IIT जोधपुर का यह शोध भारत ही नहीं,वैश्विक स्तर पर कैंसर इलाज की दिशा बदलने की क्षमता रखता है।
