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जसधारी गोरांधाय का बलिदान प्रेरणादायक: ओझा

बलिदानी जसधारी गोरांधाय की जयंती मनाई -छह खम्भों की छतरी पर पुष्पांजलि अर्पित की

जोधपुर(दूरदृष्टीन्यूज),जसधारी गोरांधाय का बलिदान प्रेरणा दायक: ओझा। मुगल बादशाह के हमले से शिशु महाराजा अजीतसिंह को बचाकर लाने वाली बलिदानी जसधारी गोरां धाय की 380वीं जयंती गुरुवार को हाईकोर्ट रोड स्थित उनकी छतरी पर मनाई गई। यहां माली समाज और अन्य वर्गों ने पुष्पांजलि अर्पित कर उनकी शहादत को नमन किया।

इस अवसर पर पूर्व महापौर घनश्याम ओझा ने गोरांधाय को पुष्पांजलि अर्पित करते हुए कहा कि नारियों द्वारा सर्वोत्कृष्ट त्याग कर राष्ट्र निर्माण में अमूल्य योगदान दिया है, ऐसी चरित्रवान महिलाओं के इतिहास को जन-जन तक पहुंचाना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है।
गोरांधाय टाक छतरी पर्यटकों के लिए ऐतिहासिक स्थल के रूप में पहचान बनी हुई है।

इस अवसर पर पूर्व महापौर कुन्ती देवड़ा ने पुष्पांजलि अर्पित करते हुए कहा कि नारियों में राष्ट्र चेतना जागृत करने में गोरांधाय टाक के त्यागमय जीवन से बड़ा और कोई उदाहरण हो नहीं हो सकता।इस अवसर पर सर्वसमाज के विभिन्न संस्थाएं एवं संगठनों ने पुष्पांजलि अर्पित कर गोरांधाय टाक के त्याग को नमन किया।

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इस अवसर भाजपा प्रदेश कार्य समिति सदस्य एवं पूर्व जिलाध्यक्ष जोधपुर शहर नरेंद्र सिंह कच्छवाहा,पूर्व राज्य मंत्री राजेंद्र सिंह सोलंकी,भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष सुभाष गहलोत, जिला उपाध्यक्ष सम्पत सिंह, एनएसयूआई के जिलाध्यक्ष डॉ.बबलू सोलंकी,निवर्तमान पार्षद अरविंद गहलोत,प्रो.डॉ श्याम सुंदर टाक,अरविंद परिहार,एडवोकेट विजय शर्मा,देवीलाल पंवार,विरेंद्र सिंह कच्छवाहा, प्रेमचंद सांखला, तारा सिंह सांखला,संतु सिंह मेडतिया,एकता परिहार, डॉ.निधि गहलोत,अदिती गहलोत, तेजकंवर,सुशीला भाटी सहित कई वरिष्ठ एवं गणमान्य नागरिकों,युवाओं ने पुष्पांजलि की। सैनिक क्षत्रिय माली सांस्कृतिक संवर्धन एवं इतिहास शोध संस्थान के अध्यक्ष आनंद सिंह परिहार ने आगन्तुकों का स्वागत एवं सचिव ताराचंद गहलोत ने धन्यवाद दिया।

उल्लेखनीय है कि शिशु महाराजा अजीतसिंह को मुगल बादशाह के शिकंजे से निकाल कर लाने वाली महा बलिदानी गोरां धाय पत्नी मनोहर गहलोत की स्मृति में इस छतरी और बावड़ी का निर्माण करवाया गया था। सन 1712 में महाराजा अजितसिंह ने गोरां धाय के बलिदान और उनकी स्मृति में छह खम्भों की एक छतरी का निर्माण करवाया। ताकि आने वाली पीढियां उनके बलिदान और स्वामिभक्ति के बारे में स्मरण करते रहें।