हजूर साहिब यात्रा से लौटा 185 श्रद्धालुओं का जत्था
अमृत कुंड और 10 गुरुद्वारों के किए दर्शन -सेवादारों ने निभाई सेवा
जोधपुर(दूरदृष्टीन्यूज),हजूर साहिब यात्रा से लौटा 185 श्रद्धालुओं का जत्था। चौपासनी हाउसिंग बोर्ड सेक्टर-8 स्थित गुरुद्वारा श्रीगुरु रामदास साहब से 16 मई से 22 मई तक हजूर साहिब गए 185 श्रद्धालुओं का जत्था शुक्रवार को सकुशल जोधपुर लौट आया। प्रधान बलदेव सिंह के नेतृत्व में संगत रेल द्वारा यात्रा पर गई थी।
गुरु गोविंद सिंह की तपोभूमि के दर्शन
प्रधान बलदेव सिंह ने बताया कि महाराष्ट्र के नांदेड़ में गोदावरी नदी के तट पर स्थित हजूर साहिब सिखों के पंच पवित्र तख्तों में से एक है। यहीं 1708 में दसवें गुरु,गुरु गोविंद सिंह जोत समाए थे। उन्होंने अपना अंतिम समय यहीं बिताया और बाबा नंद सिंह को हाथ तेरा, खीसा मेरा का आशीर्वाद देकर लंगर शुरू कराया था। आज भी यहां 24 घंटे लंगर चलता है।
10 गुरुद्वारों के किए दर्शन
जत्थे ने गुरुद्वारा नानकसर साहिब,रतनगढ़ साहिब, शिकारगढ़ साहिब,माता साहिब देवाजी,हीरा घाट साहिब,माल टेकड़ी साहिब,संगत साहिब, शहीद बाबा दीप सिंह, यादगार शहीद भाई मनी सिंह के दर्शन किए।
नानक झीरा:जहां अंगूठे से निकली जलधारा
संगत ने कर्नाटक के बीदर स्थित नानक झीरा साहिब के भी दर्शन किए। मान्यता है कि गुरु नानक देवजी ने यहां पानी की कमी से जूझ रहे लोगों के लिए पहाड़ी पर अंगूठे से टटोलकर मीठे जल की धारा निकाली थी। यह धारा आज भी बह रही है और इसे अमृत कुंड कहा जाता है।
शुक्राने की अरदास
दर्शन के बाद ज्ञानी प्रीतम सिंह ने पूरी संगत की ओर से शुक्राने की अरदास की।यात्रा में अशोक सिंह,बोहड़ सिंह,महेश अयानी, प्रमोद,जय,दिवांशु,कारण,तीर्थ, क्रश,हर्षित,मानव,क्षितिज पाल, चरणजीत सिंह,दिव्या,रिया, मनोज,दिपति,भावेश,सुरेंद्र कौर,मनमोहन सिंह,गोल्डी सहित कई सेवादारों ने सेवा दी।
