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PMKSY 2.0: जोधपुर में 12 जिलों के लिए PRA कार्यशाला शुरू

  • आफरी में थ्योरी-लूणी में प्रैक्टिकल
  • जन सहभागिता से बनेगी जलग्रहण परियोजनाओं की DPR

जोधपुर(दूरदृष्टीन्यूज),PMKSY 2.0: जोधपुर में 12 जिलों के लिए PRA कार्यशाला शुरू। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना 2.0 के जल ग्रहण घटक के तहत संभाग स्तरीय PRA कार्यशाला बुधवार को आफरी,जोधपुर में शुरू हुई। यूनिसेफ के सहयोग से हो रही तीन दिवसीय कार्यशाला में बीकानेर और जोधपुर संभाग के 12 जिलों के अधिकारी-कर्मचारी भाग ले रहे हैं।

क्या है मकसद
Participatory Rural Appraisal (PRA) टूल्स से जन सहभागिता के आधार पर DPR तैयार करना,ताकि जलग्रहण परियोजनाओं में गांव के लोग खुद तय करें कि कौन-सा काम कहां होना चाहिए। इससे योजनाएं जमीन की जरूरत के हिसाब से बनेंगी और परिणामोन्मुखी होंगी।

पहला दिन: आफरी में थ्योरी क्लास
कार्यशाला का शुभारंभ DCF आफरी रमेश बिश्नोई के मुख्य आतिथ्य और अतिरिक्त मुख्य अभियंता भागीरथ बिश्नोई की अध्यक्षता में हुआ। अतिरिक्त निदेशक नरेंद्र सिंह और संयुक्त निदेशक नितिन श्रीवास्तव विशिष्ट अतिथि थे। यूनिसेफ के टीम लीडर राजीव यादव ने PRA टूल्स से DPR में कार्यों के चयन की प्रक्रिया समझाई। प्रतिभागियों को बताया गया कि सहभागी दृष्टिकोण से योजनाएं ज्यादा प्रभावी बनती हैं।

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अगले दो दिन: लूणी में फील्ड प्रैक्टिस
दूसरे और तीसरे दिन प्रशिक्षणार्थी लूणी ब्लॉक के गांवों में जाकर व्यावहारिक अभ्यास करेंगे। वहां वे वास्तविक परिस्थितियों में PRA तकनीकों का इस्तेमाल सीखेंगे।

अधिकारियों ने क्या कहा
ACE भागीरथ बिश्नोई, AD नरेंद्र सिंह और SE जगदीश चौधरी ने PRA की उपयोगिता बताई। EE अनूप कुमार गोरा (ओसियां), भगवान सिंह जैतावत (लूणी) और AE श्रवण राम (कैरू) ने मंच से अपने अनुभव साझा किए।

निष्कर्ष
यह कार्यशाला कागज पर नहीं, जमीन पर और जनता के साथ प्लानिंग का मॉडल है। जलग्रहण विकास में जन सहभागिता बढ़ाने से PMKSY 2.0 के काम ज्यादा असरदार होंगे। आयोजन अधीक्षण अभियंता,वाटरशेड जोधपुर द्वारा किया जा रहा है।

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