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गणित को संगीत के माध्यम से सरल व रुचिकर बनाया जा सकता है

-दया जोशी

हल्द्वानी,गणित को संगीत के माध्यम से सरल व रुचिकर बनाया जा सकता है। गणित संपूर्ण संसार का एक जटिलतम विषय है। परंतु इस विषय को हम संगीत के माध्यम से सरल एवं रुचिकर बना सकते हैं। जिस प्रकार संगीत किसी भी वाद्य यंत्र से एक-एक स्वर को साफ एवं स्पष्ट बोलता है उसी प्रकार गणित की जटिल से जटिल समस्या को हम बड़े ही आसान तरीके से हल कर सकते हैं।

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संगीत के 7 स्वर से सारे संगीत के सुर निकल आते हैं। उसी प्रकार गणित में संख्या 0 से 9 तक की इकाइयों से सारे गणित की परेशानियां हल की जा सकती हैं परंतु इन संख्याओं का प्रयोग किस प्रकार किया जाना है यह अति आवश्यक है उसके लिए एक अच्छे गुरु का होना अति आवश्यक है। जो गणित के ज्ञान को साथ-साथ हमारी तार्किक शक्ति मानसिक शक्ति दोनों का विकास कर सके।

जिस प्रकार संगीत सीखने के लिए सतत प्रयास एवं एकाग्रचित होना आवश्यक है। उसी प्रकार गणित विषय की पढ़ाई के लिए सतत प्रयास एवं एकाग्रचित होना अति आवश्यक है लेकिन अभिभावकों को भी एक जिम्मेदारी लेनी होगी अपने पाल्य को ऐसा वातावरण दें। एकांत आवास के साथ-साथ छात्र की गतिविधि पर नजर बनाए रखें।बालक,बालिकाओं को सोशल मीडिया एवं मोबाइल फोन से दूर रखें। उन्हें किताबों से पढ़ने के लिए प्रेरित करें। बच्चों के साथ बैठकर अपने अनुभवों को साझा करें।

भूत,वर्तमान और भविष्य काल के बारे में उन्हें ज्ञान दें। ऐसा इसलिए कि 80 के दशक के वह लोग जो कलम और कमेंट से पढ़कर कंप्यूटर तक पहुंचे हैं उनका ज्ञान दें,उन्हें प्रेरित करें कि आप कंप्यूटर के समय के बच्चे हैं आपको और बहुत आगे बढ़ाना है। परंतु आज के बच्चे कंप्यूटर से कहां तक पहुंच सकते हैं यह देखना अति आवश्यक होगा। इसलिए उन्हें हमारे वैदिक शिक्षा का ज्ञान होना भी आवश्यक है क्योंकि ऋग्वेद में लिखा है।

‘बहूभि विप्रलापे किम त्रिलोक्य सचराचरे यत किंचस्वत्सर्वे गणितयेन बिना नहीं।’

अर्थात इस सकल जगत संसार में अति रोने से कोई काम नहीं चलेगा यहां जो कुछ भी है गणित विषय के बिना संभव नहीं है। कोरोना संकट के चलते बच्चों में काफी बदलाव आया है। उन्हें समझाने में ज्यादा मेहनत करनी पड़ रही है। कुछ बच्चे काफी जिद्दी स्वभाव के बन गए हैं, एकांत में मोबाइल चलाना पसंद करते हैं। अपने माता-पिता गुरुजनों का आधार भी नहीं कर रहे हैं तो हम संगीत के माध्यम से उन्हें सही राह में ला सकते हैं।

अच्छी सलाह देकर उन्हें गणित जैसे विषय में रुचि दिला सकते हैं क्योंकि यह एक प्रयोगात्मक विषय है, बिना प्रयोग के संभव नहीं है। हमें इसके लिए समय देना होगा बच्चों को उनके अच्छे व्यवहार को संगीत के माध्यम से एवं गणित पर रुचि पैदा करके ऐसा किया जा सकता है।

प्रारंभिक शिक्षा से ही गणित के सूत्रों को प्रयोग करना सीखना होगा। इस माध्यम से उन्हें धीरे-धीरे परिपक्व बनाया जा सकता है जिससे आने वाले समय में वह बच्चे गणित को संगीत के माध्यम से बेहतर तरीके से पढ़ सकें। गणित एक ऐसा विषय है जिसमें एक बार रुचि पैदा हो जाए तो हमेशा रुचि बनी रहती है।

गणित एक सकारात्मक नशा है,संगीत भी एक सकारात्मक नशा है।गणित मान सम्मान देता है,संगीत भी मान सम्मान देता है।
गणित से आत्म विश्वास बढ़ता है,संगीत से भी विश्वास में वृद्धि होती है। गणित मंच का डर समाप्त करता है। संगीत भी मंच का डर समाप्त करती है। गणित विषय का ज्ञान आत्म बल बढ़ता है। संगीत का ज्ञान भी आत्म बल बढ़ता है। गणित विषय आत्मसम्मान बढ़ता है,संगीत भी आत्म सम्मान को बढ़ाता है। गणित विषय व्यवहारिक बनाता है। संगीत का ज्ञान भी व्यावहारिक बनता है।

अर्थात एक सफल मनुष्य को व्यावहारिक होना अति आवश्यक है। बच्चों को व्यावहारिक एवं सफल बनाने के लिए बच्चों की रुचि के हिसाब से काम देना चाहिए लेकिन उसे काम में उनकी क्षमता को भी परखना आवश्यक होगा। आजकल हर बच्चा क्रिकेट का खिलाड़ी बनना चाहता है।

140 करोड़ जनसंख्या वाले देश में केवल 11 से 15 खिलाड़ी ही देश की क्रिकेट टीम में जा सकते हैं, बाकी की मेहनत वहां तक उन्हें नहीं पहुंचा सकती है। अर्थात उनकी रूचि और उनकी सामर्थ्य के हिसाब से उन्हें उसे काम में रुचि पैदा करवानी चाहिए। गणित एक ऐसा विषय है जो किसी भी व्यक्ति की शोभा को इस प्रकार बढ़ा देता है कि..

‘यथा शिखा मयूराणा,नागानां मणयोयथा। तद वेदांग शस्त्राणि गणित मूर्धनि वर्तते ।।’

अर्थात जिस प्रकार मोर के सिर की शिखऐ एवं नाग के सिर की मणि उसकी शोभा प्रदान करती है उसी प्रकार सभी शास्त्रों,वेदों में गणित का स्थान सर्वोपरि है,बिना गणित के ज्ञान से विज्ञान का ज्ञान संभव नहीं है। बिना विज्ञान के ज्ञान से कंप्यूटर का ज्ञान भी संभव नहीं है। मेरा सभी लोगों से कहना है आप अपने बच्चों को संगीत के माध्यम से गणित में रुचि पैदा कर एक अच्छा व्यावहारिक नागरिक बनाएं।

डॉ.बसंत बल्लभ पांडेय
प्रिंसिपल,क्वींस पब्लिक स्कूल,हल्द्वानी

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