कोटद्वार बस अड्डे की बदहाली: न बैठने की जगह,न छांव

बुजुर्ग-महिलाएं सड़क पर खड़े होने को मजबूर

कोटद्वार(दूरदृष्टीन्यूज),कोटद्वार बस अड्डे की बदहाली: न बैठने की जगह,न छांव। महाराजा भरत की जन्मस्थली,कण्व नगरी और गढ़वाल का द्वार कहे जाने वाले कोटद्वार का बस अड्डा अपनी दुर्दशा पर आंसू बहा रहा है। नगर निगम का दर्जा प्राप्त होने और यहां से विधायक होने के बावजूद यात्रियों के लिए बुनियादी सुविधाएं तक नदारद हैं।

स्थानीय जागरूक निवासी राजेश थपलियाल ने अपनी पीड़ा साझा करते हुए कहा कि “बस अड्डे को देखकर लगता ही नहीं कि यहां प्रशासन या कोई जनप्रतिनिधि है। आलम यह है कि बसों का इंतजार कर रहे बुजुर्ग,महिलाएं और बच्चे घंटों खुले में खड़े रहने को मजबूर हैं।

न शेड,न कुर्सी,न पेड़ की छांव
बस अड्डे पर यात्रियों के बैठने के लिए न शेड है, न कुर्सी। धूप और बारिश से बचने के लिए एक पेड़ तक नहीं लगाया गया। फुटपाथ पर खोखे और ठेले वालों का कब्जा है।

जानबूझकर गीला करते हैं फुटपाथ
राजेश थपलियाल का आरोप है कि जहां कहीं खाली जगह दिखती है, खोखे वाले उसे पानी से गीला कर देते हैं,ताकि कोई यात्री वहां बैठ न सके। हालात ये हैं कि कुछ दुकानदार तो अपनी कुर्सी लेकर फुटपाथ पर ही जम जाते हैं। मजबूरन बृद्ध, महिला,बच्चे सभी सड़क पर खड़े होकर बस का इंतजार करते हैं।

नगर निगम और विधायक से गुहार
कोटद्वार से पूरे भारत के लिए बस और रेल सेवाएं उपलब्ध हैं। रोजाना सैकड़ों यात्री यहां से गुजरते हैं। इसके बावजूद बस अड्डे की यह दुर्दशा प्रशासनिक उदासीनता पर सवाल खड़े करती है।

नागरिकों ने नगर निगम प्रशासन तथा स्थानीय विधायक से अपील की है कि यात्रियों की सुविधा के लिए तत्काल शेड,कुर्सी, पेयजल और फुटपाथ को अतिक्रमण मुक्त कराया जाए,ताकि कोटद्वार की छवि पर दाग न लगे और आमजन को राहत मिल सके।