एक साल में बदली चम्पावत प्रशासन की तस्वीर
- किसान के बेटे डीएम मनीष कुमार ने बनाई अलग पहचान
- जनता दरबार से व्हाट्सएप शिकायत व्यवस्था तक
- संवेदनशील प्रशासन और त्वरित कार्रवाई से जीता लोगों का भरोसा
-दया जोशी
चम्पावत,सीमांत जनपद चम्पावत में बीते एक वर्ष के दौरान प्रशासनिक कार्यसंस्कृति में उल्लेखनीय बदलाव देखने को मिला है। 20 जून 2025 को जिलाधिकारी का पदभार संभालने वाले किसान पुत्र मनीष कुमार ने शुरुआत से ही यह स्पष्ट कर दिया था कि उनका उद्देश्य केवल सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन नहीं,बल्कि चम्पावत को एक आदर्श और जनकेंद्रित जनपद के रूप में विकसित करना है।
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कार्यभार ग्रहण करने के बाद अधिकारियों के साथ पहली ही बैठक में उन्होंने समय की महत्ता पर जोर देते हुए कहा था कि चम्पावत को मॉडल जिला बनाने के लिए हर पल का सदुपयोग जरूरी है। इसके बाद उन्होंने खुद फील्ड में उतरकर काम करने की जो कार्यशैली अपनाई,वह पूरे प्रशासनिक तंत्र के लिए प्रेरणा बनी।
बारिश,आपदा और भूस्खलन जैसी विषम परिस्थितियों में भी जिलाधिकारी लगातार मौके पर पहुंचते रहे। रात के अंधेरे में प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण हो या राष्ट्रीय राजमार्ग के डेंजर जोन में राहत कार्यों की निगरानी, उनकी सक्रिय मौजूदगी ने प्रशासनिक मशीनरी को अधिक जवाबदेह और गतिशील बनाया।
जनता दरबार को भी उन्होंने नई पहचान दी। आम लोगों की समस्याओं को गंभीरता से सुनना,मौके पर संबंधित अधिकारियों को निर्देश देना और शिकायतों के त्वरित समाधान की व्यवस्था करना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही। यही कारण है कि जनता दरबार में लोगों की भागीदारी बढ़ी और प्रशासन के प्रति विश्वास मजबूत हुआ।
जिलाधिकारी का मानना है कि किसी भी जिले की वास्तविक प्रगति आंकड़ों से नहीं,बल्कि आम लोगों के चेहरे पर दिखाई देने वाली संतुष्टि से आंकी जानी चाहिए। इसी सोच के तहत उन्होंने सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने पर विशेष जोर दिया।
रिवर्स पलायन को रोकने और ग्रामीण क्षेत्रों को मजबूत बनाने के लिए भी उन्होंने गांव-गांव जाकर लोगों से संवाद किया। मूलभूत सुविधाओं के विस्तार,रोजगार और स्वरोजगार के अवसरों को बढ़ावा देने के प्रयासों का असर कई क्षेत्रों में दिखाई देने लगा है।
उनकी संवेदनशील कार्यशैली की झलक कई अवसरों पर देखने को मिली। दुर्घटनाओं और आपदा की घटनाओं में उन्होंने स्वयं राहत कार्यों की निगरानी की। एक मामले में वाहन उपलब्ध न होने पर घायल महिला को अपनी सरकारी गाड़ी से अस्पताल पहुंचाकर उन्होंने मानवीय संवेदनाओं का परिचय दिया।
ग्रामीण क्षेत्रों के दौरे के दौरान जिलाधिकारी ने लोगों से अपील की कि छोटी-छोटी समस्याओं के लिए जिला मुख्यालय के चक्कर लगाने की बजाय सीधे व्हाट्सएप के माध्यम से शिकायत भेजें। इस पहल से न केवल लोगों का समय और पैसा बचा,बल्कि शिकायतों के निस्तारण की प्रक्रिया भी तेज हुई। एक वर्ष के भीतर चम्पावत में प्रशासन और जनता के बीच संवाद, विश्वास और जवाबदेही की जो नई संस्कृति विकसित हुई है,उसे लोग जिलाधिकारी मनीष कुमार की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक मान रहे हैं।
चम्पावत के बांसगांव निवासी दर्शन राम अपने एक बेटे की आपदा में मृत्यु और दूसरे बेटे के लापता होने के बाद गहरे मानसिक और आर्थिक संकट से गुजर रहे थे। परिस्थितियां ऐसी हो गई थीं कि उन्होंने जीवन से उम्मीद छोड़ दी थी।
जिलाधिकारी मनीष कुमार से मुलाकात के बाद उनके मामले की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए गए। उनकी झोपड़ी को पक्के आवास में बदलने की प्रक्रिया शुरू कराई गई और प्रशासन की ओर से हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया गया। प्रशासन की इस संवेदन शील पहल ने दर्शन राम को नई उम्मीद और जीवन जीने का हौसला दिया।
