बदलते युद्ध के दौर में तकनीक आत्मनिर्भरता और सामरिक साझेदारी जरूरी
- राजनाथ सिंह का संदेश
- तरंग शक्ति-2026
- रक्षामंत्री ने आधुनिक युद्ध की चुनौतियों और मित्र देशों के साथ सहयोग बढ़ाने पर दिया जोर
जोधपुर(दूरदृष्टीन्यूज),बदलते युद्ध के दौर में तकनीक आत्मनिर्भरता और सामरिक साझेदारी जरूरी। केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को जोधपुर वायुसेना स्टेशन पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय हवाई सैन्य अभ्यास ‘तरंग शक्ति- 2026’ के कार्यक्रम में शिरकत की।
सुबह 10.55 बजे जोधपुर एयर फोर्स स्टेशन पहुंचे रक्षा मंत्री ने भारतीय वायुसेना के जवानों, मित्र देशों के वायुसेना प्रमुखों, सैन्य अधिकारियों,पायलटों और प्रतिनिधिमंडलों से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने अभ्यास के सफल आयोजन के लिए भारतीय वायुसेना सहित इससे जुड़े सभी संस्थानों और संगठनों को बधाई दी।
रक्षा मंत्री ने कहा कि बहुराष्ट्रीय सैन्य अभ्यास विभिन्न देशों की वायु सेनाओं को एक-दूसरे के अनुभवों,तकनीकों और रणनीतियों को समझने तथा आपसी विश्वास और परिचालन समन्वय मजबूत करने का अवसर प्रदान करते हैं।
राजनाथ सिंह ने कहा कि आधुनिक युद्ध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। अब युद्ध केवल थल,जल और वायु तक सीमित नहीं है, बल्कि अंतरिक्ष,साइबर क्षेत्र,विद्युत चुंबकीय स्पेक्ट्रम और सूचना क्षेत्र भी इसके महत्वपूर्ण हिस्से बन चुके हैं। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणालियों और लंबी दूरी तक सटीक हमला करने वाले हथियारों ने युद्ध की प्रकृति और गति को बदल दिया है। ऐसे में भविष्य की सैन्य ताकत का आकलन केवल हथियारों की संख्या से नहीं, बल्कि दुश्मन की गतिविधियों को समझने,त्वरित निर्णय लेने और सटीक कार्रवाई करने की क्षमता से होगा।
आत्मनिर्भर रक्षा क्षमता पर भारत का जोर
रक्षा मंत्री ने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों और तेजी से बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्य में प्रत्येक देश के लिए सतर्क रहना जरूरी है। प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को राष्ट्रीय नीति के रूप में अपनाया है। लंबे समय तक चलने वाले युद्धों की चुनौतियों का सामना करने के लिए अपने हथियारों और महत्वपूर्ण तकनीकों का उत्पादन करने की क्षमता आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के समय सीमित संसाधनों के साथ शुरुआत करने वाली भारतीय वायुसेना आज आधुनिक विमानों, सटीक मारक हथियारों, अत्याधुनिक सेंसर और एकीकृत नेटवर्क से सुसज्जित सक्षम सैन्य बल बन चुकी है।
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तेजस लड़ाकू विमान,ध्रुव और प्रचंड हेलीकॉप्टर,लाइट यूटिलिटी हेलीकॉप्टर, आकाश वायु रक्षा प्रणाली और उन्नत रडार तकनीक भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमताओं के उदाहरण हैं। उन्नत मध्यम लड़ाकू विमान कार्यक्रम के माध्यम से पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ लड़ाकू विमान की तकनीक विकसित करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।
भविष्य की रक्षा साझेदारी में तकनीक और विश्वास की अहम भूमिका
राजनाथ सिंह ने रक्षा अनुसंधान,सह-विकास, सह-उत्पादन,रखरखाव, प्रशिक्षण और तकनीकी नवाचार के क्षेत्रों में मित्र देशों के साथ सहयोग की व्यापक संभावनाएं बताईं। उन्होंने कहा कि भविष्य में रक्षा संबंध केवल हथियारों और सैन्य प्लेटफॉर्म तक सीमित नहीं रहेंगे,बल्कि तकनीक और आपसी विश्वास उनकी सबसे बड़ी ताकत होंगे। भारत अपनी स्वदेशी क्षमताओं को मजबूत करने के साथ विश्वसनीय साझेदार देशों के साथ सहयोग बढ़ाने के लिए भी तैयार है।
रक्षा मंत्री ने ‘तरंग शक्ति-2026’ को इसी दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताते हुए कहा कि ऐसे बहुराष्ट्रीय सैन्य अभ्यास विभिन्न देशों की वायुसेनाओं को अपनी तकनीकों,रणनीतियों और परिचालन अनुभवों को साझा करने का अवसर देते हैं। इससे संयुक्त रूप से काम करने की क्षमता,आपसी समझ और समन्वय मजबूत होता है तथा भविष्य की सुरक्षा चुनौतियों से निपटने की तैयारी बेहतर बनती है।
‘तरंग शक्ति-2026’ के जरिए भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर रक्षा सहयोग,स्वदेशी तकनीक, सामरिक साझेदारी और मित्र देशों के साथ आपसी विश्वास मजबूत करने का संदेश दिया।
