शिक्षक संगठन राजनीतिक मंच नहीं, शिक्षा और शिक्षक हितों के लिए संघर्ष का मंच : मांजू
जोधपुर(दूरदृष्टीन्यूज),शिक्षक संगठन राजनीतिक मंच नहीं, शिक्षा और शिक्षक हितों के लिए संघर्ष का मंच : मांजू। शिक्षक संगठन किसी राजनीतिक गतिविधि का मंच नहीं,बल्कि शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने और शिक्षक हितों की आवाज बुलंद करने का माध्यम है। राजस्थान शिक्षक संघ प्रगतिशील के शिक्षक सम्मेलन में वक्ताओं ने यह विचार व्यक्त किए।
सम्मेलन में प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष बाबूलाल मांजू ने कहा कि संगठन का मूल उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करना है। शिक्षक संगठनों को कमजोर करने से शिक्षकों और विद्यार्थियों के हितों की आवाज कमजोर होगी। उन्होंने कहा कि 1970 में शिक्षक को मात्र 270 रुपये मासिक वेतन मिलता था, जो आज संगठनात्मक संघर्ष के बदौलत 70 से 80 हजार तक पहुंचा है।
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पूर्व प्रदेश अध्यक्ष मेहम विश्नोई ने कहा कि शिक्षक केवल सेवा तक सीमित न रहें,बल्कि नवाचार और नई तकनीक अपनाकर विद्यार्थियों के भविष्य को बेहतर बनाएं। वरिष्ठ शिक्षाविद् परसराम तिवाड़ी ने कहा कि शिक्षकों को अधिकारों के साथ कर्तव्यों के प्रति भी सजग रहना होगा।
संभाग अध्यक्ष भंवर सिंह राठौड़ और चनाराम देवासी ने कहा कि स्थानांतरण,पदोन्नति,वेतनमान जैसी समस्याओं का समाधान सामूहिक एकजुटता से ही संभव है। सरकार और संगठनों के बीच निरंतर संवाद बना रहना चाहिए। जिलामंत्री नरपत सिंह चारण ने संगठनात्मक विषय रखे,जबकि सम्मेलन का संचालन जिलाध्यक्ष ओमप्रकाश गोदारा ने किया।
अंत में सेवानिवृत्त शिक्षकों दीपाराम चारण,लूणसिंह चारण,बाबूलाल प्रजापत सहित अन्य का माला और साफा पहनाकर सम्मान किया गया। इस दौरान ओमप्रकाश खिलेरी, श्रवण गोदारा,पप्पाराम देवासी सहित बड़ी संख्या में शिक्षक मौजूद थे।
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