एम्स में बाईपास सर्जरी के साथ हार्ट अटैक के कारण हुए छेद की सफल सर्जरी
जोधपुर,एम्स में बाईपास सर्जरी के साथ हार्ट अटैक के कारण हुए छेद की सफल सर्जरी। एम्स जोधपुर के कार्डियोथोरेसिक और वैस्कुलर सर्जरी विभाग ने दिल का दौरा पड़ने वाले 70 वर्षीय व्यक्ति में वेंट्रिकुलर सेप्टम में छेद को बंद करने के साथ कोरोनरी धमनी बाईपास सर्जरी को सफलता पूर्वक करके चिकित्सा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मुक़ाम हासिल किया है। कार्डियोथोरेसिक एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. सुरेंद्र पटेल ने बताया कि मरीज को लगभग दो महीने पहले दिल का दौरा पड़ने से सीने में दर्द और बेहोशी के कारण एम्स जोधपुर के कार्डियोलॉजी विभाग में भर्ती कराया गया था।
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कार्डियोलॉजी विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ.अतुल कौशिक और उनकी टीम के मार्गदर्शन में उचित हार्ट अटैक प्रबंधन के माध्यम से रोगी की जानलेवा स्थिति को संभाला गया। इसके बाद एंजियोग्राफी से हृदय की मुख्य धमनियों में रुकावट पता चली।इसके अतिरिक्त इकोकार्डियोग्राफी की जाँच में वेंट्रिकुलर सेप्टल रैप्चर-हृदय के निलय को विभाजित करने वाली दीवार में एक छेद होने का पता चला, जिससे हृदय की कार्यक्षमता 20-25 फीसदी तक कम हो गई। महत्वपूर्ण दवाओं के साथ रोगी की स्थिति को स्थिर करने के बाद उसे सर्जरी के लिए कार्डियोथोरेसिक सर्जरी विभाग में भेजा गया।
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कार्डियोथोरेसिक एवं वैस्कुलर सर्जरी विभाग के प्रमुख एडिशनल प्रोफेसर डॉ.आलोक कुमार शर्मा ने बताया कि दिल के दौरे से के कारण मांसपेशियों में सूजन आ जाती है व ऑपरेशन के असफल और बीमार की जान जाने का जोखिम बहुत ज़्यादा होता है। इस के कारण अगर बीमार दवाइयों पर स्थिर रहता है तो दिल के दौरा पड़ने के लगभग तीन सप्ताह बाद सर्जरी करने का निर्णय लिया गया। ऑपरेशन से एक दिन पहले मरीज के दिल को इंट्रा-एओर्टिक बैलून पंप (आईएबीपी) के माध्यम से सपोर्ट किया गया,जिसे बाद में ऑपरेशन के पांच दिन बाद हटा दिया गया। डॉ.सुरेंद्र पटेल के नेतृत्व में सर्जिकल टीम ने डैक्रॉन (एक विशेष प्रकार के कपड़ा)के पैच का उपयोग करके वेंट्रिकुलर सेप्टम के छेद को सफलता पूर्वक ठीक किया और रोगी के पैरों की नस के ग्राफ्ट का उपयोग करके हृदय की धमनियों की बाईपास सर्जरी की।
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सर्जिकल टीम में कार्डियोथोरेसिक सर्जरी विभाग से डॉ.दानिशवर मीना, डॉ.आलोक कुमार शर्मा,डॉ.अनुपम दास,डॉ.मधुसूदन कट्टी और डॉ. अनिरुद्ध माथुर के साथ-साथ एनेस्थीसिया विभाग से डॉ.सादिक मोहम्मद,डॉ.अनीता और डॉ.अक्षी शामिल थे।कार्डियोलॉजी विभाग से डॉ.अतुल कौशिक और उनकी टीम, साथ ही कार्डियक परफ्यूज़निस्ट, सभी ओटी नर्सिंग अधिकारी,सभी सीटीवीएसआईसीयू नर्सिंग अधिकारी और अन्य सहायक कर्मचारियों ने बीमार को ठीक करने में सहयोग किया। ऑपरेशन के बाद मरीज ने गहन देखभाल इकाई में दो सप्ताह बिताए और अब वह पूरी तरह से ठीक हो गया है।एम्स के कार्यकारी निदेशक प्रोफेसर माधबानंद कर ने इस तरह की जटिल प्रक्रिया को सफलतापूर्वक निष्पादित करने के लिए पूरी टीम से अत्यधिक संतुष्टि व्यक्त की और हार्दिक बधाई दी।
क्या है हार्ट अटैक के बाद हुआ वेंट्रिकुलर सेप्टम का छेद (वीएसआर)
डॉ.पटेल ने बताया कि कुछ रोगियों में, दिल का दौरा पड़ने से अपर्याप्त रक्त आपूर्ति के कारण हृदय की दीवार पतली हो जाती है और बाद में फट सकती है। इसके टूटने से बाएं वेंट्रिकल से छेद में से दाएं वेंट्रिकल की ओर रक्त का प्रवाह बढ़ जाता है, जिससे फेफड़ों में रक्त का प्रेशर बढ़ जाता है। फुफ्फुसीय धमनी के भीतर भी दबाव बढ़ जाता है।इसके परिणाम स्वरूप बीमार को सांस लेने में ज़ोर आने लगता है व हृदय काम करने में विफल होने लगता तथा बहुत सारे बीमारों कि मृत्यु भी हो जाती है। इस स्थिति को ठीक करने की शल्य प्रक्रिया जटिल है और मृत्यु दर लगभग 40 प्रतिशत है। यदि दिल का दौरा पड़ने के कुछ सप्ताह बाद यह किया जाए तो हृदय की सूजन में कमी के कारण रोगी के ठीक होने की बेहतर संभावना होती है। हालाँकि, यदि दवा से रोगी की स्थिति में सुधार नहीं होता है तो तत्काल सर्जरी आवश्यक हो जाती है जिसमें मृत्यु का जोखिम बहुत अधिक होता है।
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