भंवरीदेवी हत्याकांड की जांच के लिए एसआईटी का गठन

  • 16 दिन बाद भी पुलिस के हाथ खाली
  • अब छह सदस्यीय एसआईटी करेंगी जांच
  • तीन दिन में सौंपेंगी पहली जांच रिपोर्ट

जोधपुर(दूरदृष्टीन्यूज),भंवरीदेवी हत्याकांड की जांच के लिए एसआईटी का गठन।लोहावट थानातंर्गत जंभेश्वरनगर गांव में घर के बाहर सो रही महिला भंवरीदेवी की धारदार हथियार से हत्या और उसकी दो बेटियों पर जानलेवा हमले के मामले में 16 दिन बाद भी पुलिस के हाथ खाली हैं। इस मामले की जांच के लिए पुलिस मुख्यालय ने एक विशेष अनुसंधान दल (एसआईटी) का गठन किया है। पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार शर्मा ने इसके आदेश जारी कर दिए हैं।

चार माह से फरार तस्करी का वांटेड गिरफ्तार

आदेशानुसार आरपीटीसी जोधपुर के पुलिस उप महानिरीक्षक देवेन्द्र विश्नोई एसआईटी के प्रभारी होंगे। इसके साथ ही इस दल में पुलिस अधीक्षक फलोदी सतनाम सिंह,साइबर अपराध पुलिस मुख्यालय जयपुर के पुलिस अधीक्षक सुमित मेहरडा, विशेष अनुसंधान इकाई महिला अत्याचार जालोर के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कैलाश विश्नोई,सीआईडी (सीबी) रेंज सैल जोधपुर के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुभाष खोजा और साइबर थाना जोधपुर ग्रामीण के पुलिस उप अधीक्षक भवानी सिंह को भी लिया गया है।

उपरोक्त टीम पुलिस उप महानिरीक्षक देवेन्द्र विश्नोई के पर्यवेक्षण में कार्य करेगी तथा अनुसंधान की प्रगति से समय-समय पर अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक, अपराध शाखा, राजस्थान को अवगत करवाएगी।एसआईटी प्रभारी उपरोक्त के अतिरिक्त जोधपुर रेंज के महानिरीक्षक की अनुमति से अन्य अधिकारियों को भी सह नियोजित कर सकेगें। उक्त टीम प्रकरण के अनुसंधान की प्रथम प्रगति रिपोर्ट तीन दिन में पेश करेगी।

यह है मामला
दरअसल अज्ञात नकाबपोश हमलावर ने 27 जुलाई की रात भंवरीदेवी विश्नोई पर हमला कर उसकी हत्या कर दी थी। घटना में घायल दोनों बालिकाओं में से बड़ी बेटी रामज्योति का जोधपुर में उपचार जारी है। हत्याकांड का खुलासा और आरोपी की गिरफ्तारी नहीं होने से लोगों में आक्रोश है। इसी मांग को लेकर लोहावट पुलिस थाने के बाहर एक सप्ताह से बेमियादी अनशन और धरना जारी है।

इनमें लोहावट के पूर्व विधायक किसनाराम विश्नोई भी शामिल हैं,जो 6 अगस्त से लगातार अनशन पर बैठे हैं। लगातार अनशन के कारण उनके स्वास्थ्य में गिरावट बताई जा रही है। भंवरीदेवी की हत्या के बाद लोहावट में जिला अस्पताल की मोर्चरी के बाहर 28 से 31 जुलाई तक धरना दिया गया था।

इस दौरान पुलिस और प्रशासन के बीच हुई वार्ता में कलक्टर और एसपी ने मामले का पांच दिन में खुलासा करने का लिखित आश्वासन दिया था। तय समय बीत जाने के बाद भी पुलिस की ओर से हत्याकांड का खुलासा नहीं किया गया। इसके बाद लोगों ने बेमियादी अनशन और धरना शुरू कर दिया।