शीतलाष्टमी पर घर-घर लगा शीतला माता को ठंडे का भोग, दिन भर किया ठंडे का सेवन

जोधपुर, मारवाड़ का ऐतिहासिक और परंपरागत रूप से मनाया जाने वाला पर्व शीतला माता अष्टमी घर-घर में उत्साह व उमंग से मनाया गया। रात को लोगों ने मां को भोग लगाने के लिए विभिन्न तरह के पकवान बनाए थे। जिनका भोग लगाया गया। घर परिवार के लोगों ने ठंडे का सेवन किया। घरों में चूल्हा नहीं जलाया गया। यहां तक कईयों ने चाय दूध के लिए चूल्हा नहीं जलाया। पहले परंपरानुसार सात दिन तक लगातार ठंडे का सेवन किया जाता था। मगर अब बदले परिवेश के चलते लोगबाग एक ही दिन इसका सेवन करते हैं।

इधर कागा तीर्थस्थल पर गुरूवार की शाम को मेला का विधिवत शुरूआत होने के साथ ही अब माता के भक्तों की आवक बढ़ गई है। आज लोगों ने घरों में भोग लगाने के बाद शीतला माता मंदिर भी पहुंचे। मंदिर में सुबह ही माता के भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी। माता के दर्शनार्थ पूरी तरह से सुरक्षा व्यवस्था भी कायम की गई। सीसीटीवी कैमरों के साथ ही पुलिस के सादा वस्त्रों में जवानों को भी तैनात रखा गया है। मेला स्थल पर बच्चों और बड़ों द्वारा भरपूर आनंद उठाया जा रहा है।

शीतलाष्टमी पर घर-घर लगा शीतला माता को ठंडे का भोग, दिन भर किया ठंडे का सेवन

शहर के लोगों ने शीतला माता की पूजा की। कागा की पहाडिय़ों में स्थित मंदिर में सुबह से श्रद्धालू दर्शनार्थ उमड़ने लगे थे। घरों में भी पूजा कर ठंडे भोजन का माता को भोग लगाया गया। पूरे देश में होली के सात दिन पश्चात सप्तमी का शीतला माता का पूजन किया जाता है, लेकिन जोधपुर में यह पूजा अष्टमी को होती है।

मेलास्थल पर बढ़ रही श्रद्धालुओं की भीड़

कोविड के चलते दो साल तक कागा मेला नहीं भरा गया था। लोगों ने घरों में ठंडा आदि तो बनाए मगर माता के दरबार में शीश नहीं नवा सके। अब कोविड भी लगभग खत्म हो गया है। ऐसे में शहरवासी आज सुबह से ही माता के दर्शनार्थ कागा तीर्थस्थल पर पहुंचे हैं। अलसुबह माता शीतला की भव्य आरती उतारी गई थी। मंदिर के पट 24 घंटे खुले रहेंगे। मेलास्थल के आस पास कुछ दूरी पर खोमचे वाले भी आकर जमे हैं तो बच्चों द्वारा काफी समय बाद झूलों का आनंद लिया जा रहा है।

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