पश्चिमी राजस्थान में भीषण गर्मी का कहर

  • रात को भी नहीं मिल रही राहत
  • मौसम बदलने के संकेत

जोधपुर(दूरदृष्टीन्यूज),पश्चिमी राजस्थान में भीषण गर्मी का कहर। पश्चिमी राजस्थान में भीषण गर्मी का कहर लगातार जारी है। नौतपा के दौरान पूरा प्रदेश मानो आग की तपन के बीच सांस ले रहा है। गुरुवार को तापमान ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए और कई शहरों में पारा 45 डिग्री के पार पहुंच गया।

भीषण गर्मी के साथ रातें भी लोगों को राहत नहीं दे रही हैं। गर्म हवाओं के कारण रातों की ठंडक पूरी तरह गायब हो चुकी है और लोगों को दिन-रात दोनों समय गर्मी से जूझना पड़ रहा है। मौसम विभाग ने कई जिलों में हीटवेव और ऊष्णरात्रि (गर्म रात) को लेकर ऑरेंज अलर्ट जारी किया है।

पश्चिमी राजस्थान के सीमावर्ती इलाकों में तापमान 48 डिग्री के आसपास बने रहने की संभावना है,जबकि बीकानेर,कोटा और शेखावाटी क्षेत्र में पारा 47 डिग्री तक पहुंच सकता है। तेज लू और गर्म हवाओं ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है।

हालांकि मौसम विभाग के अनुसार मौसम बदलने के संकेत हैं। एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होगा, जिससे प्रदेश के मौसम में बदलाव आएगा। 29 से 31 मई के बीच जयपुर, अजमेर,कोटा,भरतपुर, उदयपुर,जोधपुर और बीकानेर संभाग में तेज अंधड़ और बारिश की संभावना है। इस दौरान 60 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं।

हाईकोर्ट में समर वैकेशन शुरू,अब 29 जून को खुलेंगे

मौसम विभाग का कहना है कि 29 मई से तापमान में गिरावट शुरू होगी और हीटवेव से राहत मिलने की संभावना है। फिलहाल प्रदेशवासियों को कुछ और दिन तपती गर्मी का सामना करना पड़ेगा,लेकिन इसके बाद आंधी-बारिश से मौसम में राहत मिलने की उम्मीद है।

यह है भीषण गर्मी का कारण
हिंदू पंचांग के अनुसार अभी नौतपा चल रहा है। नौतपा में सूर्य रोहिणी नक्षत्र में होता है,जिस कारण सूर्य और पृथ्वी के बीच की दूरी कम होने के कारण सूर्य अपना उग्र रूप दिखाता है। इससे गर्मी ज्यादा रहती है। नौतपा में अगर बारिश नहीं हो और गर्मी अत्यधिक हो तो अच्छे मानसून का संकेत हैं। इस बार नौतपा की शुरुआत 25 मई से हुई। यह 2 जून तक रहेगा।

नौतपा प्रतिवर्ष आने वाला योग है,जब सूर्य रोहिणी नक्षत्र में आता है,तब सूर्य पृथ्वी के सबसे ज्यादा नजदीक होने के भारत के भूमंडल के भाग पर सबसे ज्यादा गर्मी रहती है। पृथ्वी के समीप सूर्य के आने से इसे नौतपा कहते हैं। 9 दिन तेज गर्मी से पृथ्वी तपती है। पारा चढ़ता है। इससे मानसून आता है। यदि सूर्य पृथ्वी के समीप न आए और तापमान नहीं बढ़े तो पृथ्वी पर जहरीले जीव जंतु ज्यादा पैदा होंगे,जो मानव के लिए खतरा सिद्ध होते हैं। ऐसे में प्रकृति ने ऐसा सहयोग बनाया,जिससे नौतपा में गर्मी से जहरीले जीव नष्ट होते हैं।

प्रतिवर्ष नौतपा ज्येष्ठ माह में आता है। इस बार ज्येष्ठ अधिक मास है, इसलिए पहले जेष्ठ माह में नौतपा की शुरुआत हुई है। अधिक मास में नौतपा आने से सूर्य की तपिश तेज होती है। यह बढिय़ा योग है। इससे गर्मी बढ़ेगी तो वर्षा भी अत्यधिक होगी।