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नफरत की दुकान पर सड़क छाप ड्रामा

राष्ट्रप्रथम

लेखक-पार्थसारथि थपलियाल

13 दिसंबर 2023,को संसद के नए भवन में दर्शक दीर्घा से लोकसभा में कूदने वाले संगठित अभियुक्तों के दुस्साहसपूर्ण कृत्य पर गृहमंत्री के वक्तव्य की मांग को लेकर विपक्ष ने जोरदार हंगामा किया। निर्धारित मानदंडों का उल्लंघन करने पर 19 दिसम्बर को संसद परिसर में धरना प्रदर्शन जारी रहा।13 दिसम्बर 2023 को लोकसभा में जो दुर्भाग्यपूर्ण घटना घटी उस पर लोकसभा अध्यक्ष,जिनके दायित्वों के अंतर्गत संसद की आंतरिक सुरक्षा भी आती है,उन्होंने घटना पर दुःख व्यक्त किया और सभी राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक की और जांच करवाकर तथ्यों से अवगत कराने की बात बताई। यह सब मीडिया में आया है। सदन की कार्यवाही चलाने के लिए सत्र से पूर्व सभी दलों ने सहमति दी थी कि प्ले कार्ड लेकर कोई नही आएगा,वेल तक कोई सदस्य नही आएगा, लेकिन प्रतिपक्षी सदस्यों ने सहमति की मर्यादाओं को तोड़ा। इस कारण 14 दिसंबर से 18 दिसंबर के मध्य राज्यसभा व लोकसभा से कुल 141 सांसद,सत्र की शेष अवधि के लिए निलंबित किए गए। पूर्व में इस प्रकार का निलंबन 15 मार्च 1989 को किया गया था जिसमे विपक्ष के 63 सांसद निलंबित किये गए थे।

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इन प्रदर्शनकारियों में “मोहब्बत की दुकान” लगानेवाले,भारत जोड़ो अभियान के अभिनेता नए ड्रामा की शूटिंग कर रहे थे। मुख्य अभिनेता थे टीएमसी के सांसद कल्याण बनर्जी। स्थगन समय के दौरान निलंबित सदस्यों में भारत के उपराष्ट्रपति और पदेन राज्यसभा सभापति की भोंडी नकल (Mimicry) प्रस्तुत की। भोंडी शब्द काफी सांस्कृतिक है जिसकी उतपत्ति भांड से हुई है। उत्तरप्रदेश में इसे नौटंकी,पंजाब में भगत,हरियाणा में सांग,राजस्थान में खयाल,महाराष्ट्र में तमाशा,तमिलनाडु में थेरुबट्टू, आदि आदि कहते हैं।नौटंकी या स्वांग मूल रूप से मनोरंजन के लिए किए जाते हैं।इनमें जीजा-साली,पति-पत्नी, जीजा-साला,ननद-भौजाई व अन्य हास्य,व्यंग्य विषयों पर लोकाभिव्यक्ति दी जाती है। भारत में सांस्कृतिक मर्यादायों में ही-परिहास होता है। दादा-दादी,नाना-नानी कभी भी नकल के विषय नही रहे।भारत में संवैधानिक पदानुक्रम (Hierarchy) में पहले स्थान पर राष्ट्रपति व दूसरे स्थान पर उपराष्ट्रपति आते हैं।19 दिसम्बर को टीएमसी संसद कल्याण बनर्जी ने संसद परिसर में उपराष्ट्रपति के सदन संचालन की मिमिक्री की।उपराष्ट्रपति की मिमिक्री करना उपराष्ट्रपति के गरिमा को ठेस पहुंचाना है। लोग सांसदों को माननीय कह कर संबोधित करते हैं लेकिन जो नौटंकी 19 दिसम्बर को संसद परिसर में कई गई वह सराहनीय कही जा सकती है? अनेक वरिष्ठ सांसद “द्रोपदी चीरहरण” दृश्य में भीष्मपितामह की भूमिका निभा रहे थे।

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दो दशकों से प्रधानमंत्री पद का प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे कॉंग्रेस के नेता और प्रधानमंत्री मुखापेक्षी युवा नेता राहुल गांधी,जो प्रशिक्षित फोटोग्राफर/वीडियोग्राफर की भूमिका में थे,यह भूल गए कि उनकी परिपक्वता का मूल्यांकन देश कर रहा है। वे किसी पिकनिक पार्टी में नही हैं। यही कारण है कि इंडी गठबंधन के नेता उन्हें प्रधानमंत्री पद का उपुयक्त दावेदार भी नही मानते। इंडी गठबंधन के दो नेताओं,बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने संयोजक/नेता के रूप में मल्लिकार्जुन खड़गे का नाम आगे कर दिया।

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संसद परिसर में सांसदों का यह आचरण किंचित मात्र स्वीकार्य नही है। यह कृत्य सड़क के किनारे किसी मदारी के मजमे से अधिक कुछ नही था। व्यवहार की विसंगति समझिये दुकान पर बोर्ड लगा है “मोहब्बत की दुकान “का, सामान बेच रहे हैं, नफरत का। क्या यह ठीक है?
अदम गोंडवी का यह शेर समझिए-

मुक्तकामी चेतना अभ्यर्थना इतिहास की
यह समझदारों की दुनिया, है विरोधाभास की।।

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