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पीटीआई अभ्यर्थियों की नियुक्ति का रास्ता साफ

फर्जी डिग्री विवाद में हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

जोधपुर(दूरदृष्टीन्यूज),पीटीआई अभ्यर्थियों की नियुक्ति का रास्ता साफ। राजस्थान हाईकोर्ट ने पीटीआई ग्रेड-3 भर्ती 2022 से जुड़े बहुचर्चित फर्जी डिग्री विवाद में अभ्यर्थियों को बड़ी राहत प्रदान की है। हाईकोर्ट की एकलपीठ ने स्पष्ट किया कि भर्ती प्रक्रिया पूरी होने के बाद जारी किए गए स्थायी डिबार (प्रतिबंध) आदेश को पूर्व प्रभाव (रेट्रोस्पेक्टिव इफेक्ट) से लागू कर अभ्यर्थियों को नियुक्ति से वंचित नहीं किया जा सकता।

न्यायाधीश कुलदीप माथुर ने एक साथ कई याचिकाओं की सुनवाई करते हुए राज्य सरकार और राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड (आरएसएसबी) को निर्देश दिया कि अभ्यर्थियों के वर्तमान शैक्षणिक दस्तावेजों का सत्यापन किया जाए और यदि वे वैध पाए जाते हैं तो संबंधित श्रेणी की मेरिट के अनुसार उन्हें नियुक्ति दी जाए।

याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता रिपुदमन सिंह राजपुरोहित ने अदालत को बताया कि वर्ष 2018 की पीटीआई भर्ती के दौरान दस्तावेज सत्यापन में कुछ अभ्यर्थियों की बीपीएड डिग्रियां वास्तविक नहीं पाई गई थीं। इसके चलते उन्हें नियुक्ति नहीं मिली थी। हालांकि उस समय उनके खिलाफ कोई आपराधिक मुकदमा दर्ज नहीं किया गया और न ही उन्हें भविष्य की किसी भर्ती परीक्षा से स्थायी रूप से प्रतिबंधित किया गया था।

बाद में इन अभ्यर्थियों ने यूजीसी से मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालयों से नई और वैध बीपीएड डिग्रियां हासिल की तथा वर्ष 2022 की पीटीआई ग्रेड-3 भर्ती परीक्षा में शामिल होकर सफल हुए। अंतिम मेरिट सूची में स्थान मिलने के बावजूद उनकी उम्मीदवारी पर पुराने विवाद के आधार पर आपत्ति दर्ज की गई।

2024 में डिबार करने के आदेश पर कोर्ट की टिप्पणी
मामले में राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड ने 9 अप्रैल 2024 को संबंधित अभ्यर्थियों को भविष्य की सभी परीक्षाओं से स्थायी रूप से डिबार करने का आदेश जारी किया था। हाईकोर्ट ने इस आदेश पर गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा कि यह आदेश भर्ती प्रक्रिया पूरी होने के बाद पारित किया गया था।

आठ और स्लीपर बसों को किया जब्त

इतना ही नहीं,अभ्यर्थियों को अपना पक्ष रखने का अवसर भी नहीं दिया गया और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन किए बिना कार्रवाई की गई। अदालत ने कहा कि ऐसी स्थिति में डिबार आदेश को वर्ष 2022 की भर्ती प्रक्रिया पर पूर्व प्रभाव से लागू नहीं किया जा सकता।

दस्तावेजों का सत्यापन कर चार माह में निर्णय लेने के निर्देश
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और आरएसएसबी को निर्देश दिया है कि याचिका कर्ताओं के वर्तमान शैक्षणिक दस्तावेजों का चार माह के भीतर सत्यापन कराया जाए। यदि जांच में दस्तावेज सही और वैध पाए जाते हैं तो अभ्यर्थियों को उनकी श्रेणी की मेरिट के अनुसार नियुक्ति दी जाए।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि नियुक्ति मिलने पर अभ्यर्थियों को पिछला वेतन (बैक वेजेज) नहीं मिलेगा, लेकिन वरिष्ठता का लाभ उस तिथि से दिया जाएगा,जिस दिन उनसे कनिष्ठ अभ्यर्थियों को नियुक्ति प्रदान की गई थी।

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत करना एक गंभीर अपराध है और संबंधित विभाग या सक्षम प्राधिकारी कानून के अनुसार उचित कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र हैं। हालांकि,किसी भी अभ्यर्थी के वैधानिक अधिकारों को समाप्त करने से पहले विधिक प्रक्रिया और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन करना अनिवार्य है।