परिवादी को फ्रॉड राशि लौटाने का आदेश
- राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग
- हाईकोर्ट का निर्णय नजरअंदाज नहीं किया जा सकता
- एसबीआई कार्ड एण्ड पेमेंट सर्विसेज पर लगाया जुर्माना
जोधपुर(दूरदृष्टीन्यूज),परिवादी को फ्रॉड राशि लौटाने का आदेश। राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने साइबर फ्रॉड मामले में महत्वपूर्ण व्यवस्था देते हुए कहा कि परिवादी के अभिलेख और साक्ष्य से यह साबित हो जाने के बावजूद भी कि ओटीपी नंबर नहीं दिए जाने पर भी क्रेडिट कार्ड से राशि निकली है, जिला उपभोक्ता आयोग द्वितीय जोधपुर द्वारा हाईकोर्ट के निर्णय को नजर अंदाज कर नहीं मानकर परिवाद खारिज किया जाना विधि सम्मत नहीं है।
परिवादी की अपील मंजूर करते हुए आयोग के अध्यक्ष देवेंद्र कच्छवाहा और सदस्य लियाकत अली ने एसबीआई कार्ड एंड पेमेंट सर्विसेज पर 15 हजार रुपए हर्जाना लगाते हुए 45 दिन में 1 लाख 12 हजार 917 रुपए मय 12 जुलाई 2025 से ब्याज और पांच हजार रुपए वाद व्यय अदा करने का आदेश दिया।
अपीलार्थी नरेन्द सिंह राठौड़ की ओर से बहस करते हुए अधिवक्ता अनिल भंडारी ने कहा कि परिवादी के क्रेडिट कार्ड से 12 जुलाई 2025 को कुछ ही समय में तीन लेनदेन बताकर कुल राशि 1 लाख 12 हजार 917 रुपए निकाल ली गई और बिना देरी के हाथोंहाथ साइबर और पुलिस थाने में रपट दर्ज करा दी गई कि बिना ओटीपी साझा किए ही राशि निकल गई।
अधिवक्ता भंडारी ने बहस करते हुए कहा कि जिला आयोग ने ऐसे मामलों में राजस्थान उच्च न्यायालय की खंडपीठ के निर्णय को यह कहकर नहीं मानने की हिमाकत की कि वे इससे बाध्य नहीं है।
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उन्होंने कहा कि तीन दिन में पीडि़त पक्षकार साइबर फ्रॉड बाबत संबंधित बैंक या वित्तीय संस्था को सूचित कर देता है तो बैंक क्षतिपूर्ति के लिए जिम्मेदार है,जिला आयोग का परिवाद खारिज किया जाना विधि सम्मत नहीं होने से रद्द किया जाएं। एसबीआई कार्ड की ओर से जिला आयोग का निर्णय यथावत रखने का अनुरोध किया गया।
राज्य उपभोक्ता आयोग ने अपील मंजूर करते हुए कहा कि राजस्थान उच्च न्यायालय के निर्णय को नजर अंदाज किया जाना विधि सम्मत नहीं है और परिवादी ने अपने अखंडनीय साक्ष्य से साबित किया कि बिना ओटीपी साझा किए ही क्रेडिट कार्ड से राशि निकली है सो जिला आयोग का निर्णय रद्द किया जाता है।
उन्होंने निर्देश दिया कि एसबीआई कार्ड एंड पेमेंट सर्विसेज अपीलार्थी को 45 दिन में 1 लाख 12 हजार 917 रुपए मय ब्याज,15 हजार रुपए हरजाना और पांच हजार रुपए वाद व्यय अदा करें अन्यथा 9 फीसदी ब्याज निर्णय तिथि से देना होगा।
