No event other than the turban ceremony against the evildoers

जोधपुर, जिले के बाप उपखंड के चाखू गांव के हेमाराम मकवाना के देहांत के बाद उनके पुत्रों ने गंगास्नान, मुंडन और मृत्युभोज जैसी गैर जरूरी और अवैज्ञानिक परम्पराओं को तोड़ते हुए समाज को चेतनाशील करने की दिशा में गंभीर पहल की है।
इस क्षेत्र में हेमजी के नाम से कोई अपरिचित नहीं था, लम्बे समय से बीमार हेमजी ने 80 वर्ष की उम्र में 30 अप्रैल को चाखू गांव से 5 किमी दूर अपनी ढाणी में अंतिम सांस ली, उनके निधन के बाद मकवाना परिवार को हजारों की संख्या में शोक संदेश और संवेदना संदेश प्राप्त हुऐ। उनके पुत्र एडवोकेट किशन मेघवाल, भैराराम मकवाना और अर्जुन मकवाना, छगनलाल मकवाना, कानाराम मकवाना और नारायण मकवाना ने गंभीर पहल करते हुए सभी तरह की कूरीतियों का त्याग करते हुए दस दिन में ही कपड़े बदलने का फैसला कर दिया, इसी कड़ी में हर पुरूष सदस्य ने पाग बदलने की रस्म निभाई।

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