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उपभोक्ता आयोग के आदेश की अवहेलना पर जेडीए अफसर तलब

  • सात साल बाद भी नहीं दिया भूखंड
  • आयुक्त-सचिव को होना पड़ा हाजिर

जोधपुर(डीडीन्यूज),उपभोक्ता आयोग के आदेश की अवहेलना पर जेडीए अफसर तलब।जोधपुर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग (प्रथम) के अध्यक्ष राजकुमार सुथार ने करीब सात साल पहले जारी आदेश की पालना नहीं करने पर जेडीए आयुक्त उत्साह चौधरी और सचिव भागीरथ विश्नोई के खिलाफ जमानती वारंट जारी कर उन्हें कोर्ट में तलब किया।

परिवादी कांता जैन के मामले में उपभोक्ता आयोग के 2018 के आदेश की पालना नहीं करने को लेकर अवमानना याचिका दायर की गई थी। दोनों अधिकारी आज व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित हुए। उन्होंने कोर्ट को बताया कि वे आदेश की आंशिक पालना कर चुके हैं। अब कांता जैन को आनंद विहार में विकल्प के रूप में प्लॉट देने के लिए तैयार है। कांता जैन की ओर से एडवोकेट ओमप्रकाश कुमावत ने उपभोक्ता आयोग में वाद पेश कर बताया था कि परिवादिया का पूरी पाल रोड योजना में प्लॉट नंबर 97 था। इसका जेडीए ने सारा पेमेंट ले लिया था। इसके बाद जेडीए ने लीज भी जारी कर दी थी,लेकिन आज तक कब्जा नहीं दिया। इस समस्या के कारण कांता जैन की ओर से साल 2016 में मुकदमा दायर किया था।

इस मामले की सुनवाई के बाद उपभोक्ता आयोग ने 3 अगस्त 2018 को जैन के पक्ष में फैसला सुनाते हुए आदेश दिया था कि जेडीए परिवादी को समतुल्य भूखंड और 25 हजार रुपए का मुआवजा दे। इस पर जेडीए ने मुआवजा की राशि तो दे दी,लेकिन आदेश के सात साल बाद भी भूखंड नहीं दिया। इसी के खिलाफ कांता जैन की ओर से धारा 72 के तहत अवमानना याचिका दायर की गई थी, जो साल 2019 से लंबित थी।

नोटिस के बावजूद नहीं आए अधिकारी
अवमानना याचिका पर कई बार जेडीए अफसरों को नोटिस जारी किए गए थे,लेकिन अधिकारियों ने न तो आदेश की पालना की और न ही कोर्ट में उपस्थित हुए। इसके बाद कोर्ट ने 28 अगस्त को दस हजार रुपए के जमानती वारंट जारी कर जेडीए आयुक्त उत्साह चौधरी और सचिव भागीरथ विश्नोई को तलब किया था। इन्हें 19 सितंबर को कोर्ट में पेश होने को कहा गया था।

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आनंद विहार में प्लॉट देने का प्रस्ताव
वारंट की पालना में शुक्रवार को जेडीए आयुक्त और सचिव उपभोक्ता आयोग के समक्ष पेश हुए। इन्होंने कोर्ट को बताया कि वे पहले पाल रोड पर प्लॉट देने का आदेश था, लेकिन अब वे आनंद विहार में विकल्प के रूप में प्लॉट देने के लिए तैयार हैं। इस पर कांता जैन के वकील ओम प्रकाश कुमावत ने कहा कि समतुल्य भूखंड का मतलब है कि सरकार द्वारा हर एरिया वाइज जो रेट फिक्स की जाती है,उसी डीएलसी के अनुसार भूखंड दिया जाना चाहिए।

स्थान की दूरी को लेकर जताई आपत्ति
वकील कुमावत ने कोर्ट में कहा कि आनंद विहार जोधपुर से 25-30 किलोमीटर दूर बडली में है, जबकि उनके मुवक्किल का मूल भूखंड 7-8 किलोमीटर की दूरी पर सुभाष नगर पूर्वी-पश्चिम विस्तार योजना में था। दोनों स्थानों में काफी अंतर है। जबकि जेडीए यदि विवेक विहार या रामराज नगर जैसे इलाके में भूखंड दे, तो उस पर परिवादिया विचार कर सकती है।

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