सोशल मीडिया पर वायरल झूठी ख़बर पर बिना पुख्ता जांच किए सेवामुक्त करना ग़लत
- राजस्थान हाईकोर्ट
जोधपुर(दूरदृष्टीन्यूज),सोशल मीडिया पर वायरल झूठी ख़बर पर बिना पुख्ता जांच किए सेवामुक्त करना ग़लत। राजस्थान उच्च न्यायालय की एकलपीठ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल हुई झूठी ख़बर पर बिना पुख्ता जांच किए सेवामुक्त करना ग़लत बताते हुए खाद्य सुरक्षा अधिकारी को सेवामुक्त करने के आदेशों पर रोक लगाई है।
जिला प्रतापगढ़ में गत चार वर्षों से खाद्य सुरक्षा ऑफिसर/फ़ूड सेफ्टी ऑफिसर पद पर कार्यरत याचिकाकर्ता सुनील कुमार पामेचा को सोशल मीडिया पर अवैध वसूली को लेकर हुई वायरल ख़बर को आधार बनाकर सेवामुक्त कर दिए जाने पर अधिवक्ता यशपाल ख़िलेरी के मार्फ़त रिट याचिका पेश कर चुनौती दी गयी।
याची की ओर से अधिवक्ता खिलेरी ने बताया कि एफएसएसएआई,नई दिल्ली से आवश्यक प्रशिक्षण उपरान्त तथा गजट नोटिफिकेशन जारी कर खाद्य सुरक्षा एवं औषधि नियंत्रण आयुक्तालय,जयपुर द्वारा याचिकाकर्ता की नियुक्ति खाद्य सुरक्षा अधिकारी पद पर 02 दिसम्बर 2022 को की गई थी और तब से वह लगातार संतोषजनक सेवाएं दे रहा है।
प्रतापगढ़ ज़िले में खाद्य पदार्थों के नमूने लेना,उसे सम्बन्धित लेबोरेट्री में जांच के लिए भेजना,नमूनों की जांच पश्चात उत्पाद खाद्य सुरक्षा मानकों पर खरा नहीं उतरने पर आवश्यक कार्यवाही करना इत्यादि सभी कार्य याचिकाकर्ता द्वारा ईमानदारी से किए जाने से दुकानदारों में भय व्याप्त हो गया और राज्य व्यापी अभियान के तहत 04 जून 2026 को ग्राम घंटाली एवं अरनोद में निरीक्षण टीम द्वारा विभिन्न दुकानों का निरीक्षण किया गया। जिससे आक्रोशित होकर स्थानीय सरपंच कचरुलाल निनामा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक झूठी ख़बर वायरल कर दी कि खाद्य सामग्री के निरीक्षण के नाम पर अवैध वसूली की जा रही हैं।
उक्त वायरल हुई झूठी ख़बर पर सीएमएचओ प्रतापगढ़ ने याचिकाकर्ता को 5 जून 2026 को नोटिस देकर स्पष्टीकरण देने को कहा। जिस पर याचिकाकर्ता ने अगले ही दिन 06 जून 2026 को अपना विस्तृत स्पष्टीकरण पेश कर दिया लेकिन जिला कलेक्टर,प्रतापगढ़ ने याचिका कर्ता द्वारा पेश हुए ज़वाब को नजरंदाज कर उसी दिन खाद्य सुरक्षा अधिकारी पद से कार्यमुक्त करने का तुगलकी आदेश 06 जून.2026 जारी कर दिया।
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याचिकाकर्ता की ओर से बताया गया कि जिला कलेक्टर,प्रताप गढ़ न तो याचिकाकर्ता का नियुक्ति अधिकारी है और न ही याचिकाकर्ता को खाद्य सुरक्षा अधिकारी पद से सेवामुक्त करने के लिए सक्षम अधिकारी है और केवल राजनीतिक दवाब में आकर दुर्भावना से,बिना मस्तिष्क का प्रयोग किए, सेवामुक्त आदेश जारी किया गया है।
प्रार्थी को सुनवाई का उचित पर्याप्त मौका भी नहीं दिया और सोशल मीडिया पर वायरल खबर की तह में गए बिना ही मात्र खानापूर्ति करते हुए याचिकाकर्ता को सेवामुक्त कर दिया गया। याचिका कर्ता को सेवामुक्त करने से पूर्व ज़िला कलेक्टर द्वारा कोई लिखित नोटिस तक नही दिया गया। याचिकाकर्ता का पक्ष सुने बिना ही उसे सेवामुक्त करना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के बिलकुल ही खिलाफ है।
याची के अधिवक्ता ख़िलेरी ने बताया कि बिना नियमानुसार उचित जांच किये याचिकाकर्ता की सेवा समाप्त नही की जा सकती हैं। दुराचार का आरोप लगा कर सेवा समाप्त करने से पूर्व तथ्यपरख जांच जरूरी है और क़ानूनन पूर्ण तथ्यात्मक जांच किये बिना किसी भी कर्मचारी के विरुद्ध कलंक लगाते हुए सेवा समाप्त नही की जा सकती हैं। ऐसे में सेवामुक्त आदेश विधिविरुद्ध और असवैधानिक है।
रिट याचिका की प्रारम्भिक सुनवाई पश्चात हाइकोर्ट जस्टिस मुकेश राजपुरोहित साहब की अवकाशकालीन एकलपीठ ने याचिकाकर्ता के सेवामुक्ति आदेशो की क्रियान्विति पर रोक लगाते हुए ज़िला कलेक्टर प्रतापगढ़ सहित राज्य सरकार को जवाब तलब किया। मामले की अगली सुनवाई छह सप्ताह बाद नियत की गई।
