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राजस्थान में आईवीएफ क्लीनिकों के पेडिंग पंजीकरण आवेदन पर हाईकोर्ट सख्त

एआरटी अधिनियम के तहत राज्य बोर्ड को कानून के अनुसार 10 दिन में फैसला करने के आदेश

जोधपुर(दूरदृष्टीन्यूज),राजस्थान में आईवीएफ क्लीनिकों के पेडिंग पंजीकरण आवेदन पर हाईकोर्ट सख्त। राजस्थान में असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (एआरटी) क्लीनिकों के पंजीकरण आवेदनों को लंबे समय तक लंबित रखने के मामले में राजस्थान हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है।

हाईकोर्ट ने राज्य असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी एवं सरोगेसी बोर्ड, जयपुर को पेडिंग पंजीकरण आवेदनों पर 10 दिन के भीतर कानून के अनुसार अंतिम निर्णय लेने के ओदश दिए हैं। जस्टिस कुलदीप माथुर की एकलपीठ ने यह आदेश कान्हा आईवीएफ अस्पताल और जानकी आईवीएफ की ओर से दायर याचिकाओं का निस्तारण करते हुए यह आदेश दिया।

याचिकाकर्ताओं के अनुसार उदयपुर स्थित कान्हा आईवीएफ अस्पताल और श्रीगंगानगर स्थित जानकी आईवीएफ की ओर से अधिवक्ता मोहित शर्मा ने अदालत को बताया कि उन्होंने असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (एआरटी) क्लीनिक लेवल-सेकंड की स्थापना के लिए निर्धारित कानूनी प्रक्रियाओं और आवश्यक मानकों का पालन किया है।

याचिकाकर्ताओं के अनुसार,असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी (रेगुलेशन) एक्ट,2021 की धारा 15 और 16 के तहत पंजीकरण के लिए वर्ष 2025 में राज्य असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी एवं सरोगेसी बोर्ड, जयपुर के समक्ष आवेदन किए गए थे।

याचिका कर्ताओं की ओर से अदालत को बताया गया कि आवेदन प्रस्तुत किए जाने के बावजूद संबंधित प्राधिकारी की ओर से लंबे समय तक उन पर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया। इसके चलते पंजीकरण की प्रक्रिया लंबित बनी रही। याचिका कर्ताओं ने हाईकोर्ट से आग्रह किया कि संबंधित प्राधिकारी को उनके आवेदनों पर कानून के अनुरूप निर्णय लेने के लिए समयबद्ध निर्देश दिए जाएं।

हाईकोर्ट ने तय की 10 दिन की डेडलाइन
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने याचिका कर्ताओं की ओर से रखी गई दलीलों और एआरटी अधिनियम, 2021 के संबंधित प्रावधानों पर विचार करते हुए राज्य असिस्टेड रिप्रोडक्टिव टेक्नोलॉजी एवं सरोगेसी बोर्ड,जयपुर के सक्षम प्राधिकारी को आदेश की प्रमाणित प्रति प्राप्त होने की तारीख से 10 दिनों के भीतर निर्णय लेने का आदेश दिया हैं।

दोनों याचिकाओं का निस्तारण करते हुए हाईकोर्ट उनके आवेदन पर अंतिम निर्णय पारित करने के आदेश दिए। हालांकि,हाईकोर्ट के आदेश का अर्थ यह नहीं है कि दोनों आईवीएफ क्लीनिकों को सीधे पंजीकरण प्रदान कर दिया गया है। अदालत ने केवल संबंधित सक्षम प्राधिकारी को लंबित आवेदनों पर कानून के अनुसार निर्धारित समय-सीमा में अंतिम निर्णय लेने का निर्देश दिया है।