अचानक आई बाढ़ ने मचाई तबाही सैकड़ों लोग लापता
नेपाल में भोटेकोशी का जलप्रलय
काठमांडू(दूरदृष्टीन्यूज),अचानक आई बाढ़ ने मचाई तबाही सैकड़ों लोग लापता। नेपाल के उत्तरी सीमावर्ती क्षेत्र में बुधवार सुबह भोटेकोशी नदी ने ऐसा रौद्र रूप लिया कि कुछ ही समय में नदी किनारे बसे इलाकों में तबाही मचादी। रसुवा जिले के तिमुरे,रसुवागढ़ी और स्याफ्रुबेसी सहित आसपास के क्षेत्रों में अचानक आई फ्लैश फ्लड ने घरों,सड़कों,पुलों और बिजली परियोजनाओं को भारी नुकसान पहुंचाया।
घटना के बाद नेपाल में बड़े पैमाने पर राहत और बचाव अभियान शुरू किया गया है। नदी के डाउनस्ट्रीम इलाकों में लोगों को सतर्क रहने और नदी किनारे से दूर जाने की सलाह दी गई है।
अचानक बढ़ा नदी का जलस्तर
बाढ़ बुधवार अचानक सुबह करीब 9 बजे आई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार पानी और मलबे का बहाव इतना तेज था कि लोगों को संभलने का मौका नहीं मिला। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में तेज बहाव के साथ भारी मलबा नीचे की ओर आता दिखाई दे रहा है।भोटेकोशी का पानी आगे त्रिशूली नदी में पहुंचने से नुवाकोट, धादिंग और अन्य डाउनस्ट्रीम इलाकों में भी खतरा बढ़ गया है।
मौतों और लापता लोगों का आंकड़ा
शुरुआती घंटों में कुछ मौतों की पुष्टि हुई थी, लेकिन जैसे-जैसे राहत दल प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचे,आंकड़ा बढ़ता गया। अलग-अलग रिपोर्टों में मृतकों की संख्या 16 से 17 बताई जा रही है,जबकि 26 पुलिस कर्मियों सहित कई लोग लापता हैं। बचाव अभियान जारी है। हताहतों का आंकड़ा बढ़ने की आशंका है।
384 यात्रियों के लापता होने की सूचना
नेपाल पर्यटन बोर्ड की प्रारंभिक जानकारी के अनुसार 384 यात्रियों के लापता होने की बात सामने आई है,जिनमें 291 विदेशी नागरिक और 93 नेपाली नागरिक बताए गए हैं। विदेशी नागरिकों में 105 भारतीयों के शामिल होने की रिपोर्ट है। बोर्ड ने इसे प्रारंभिक आंकड़ा बताया है।
अचानक कैसे आई बाड़?
नेपाल के जल तथा मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार घटना से पहले रसुवा क्षेत्र में भारी बारिश दर्ज नहीं हुई थी। प्रारंभिक वैज्ञानिक आकलन में बर्फ और चट्टानों के हिमस्खलन (ice-rock avalanche) से ल्हेंदे नदी के अवरुद्ध होने और अचानक अवरोध टूटने से भारी जलराशि के नीचे आने की आशंका जताई गई है।
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यह भी है संभावना:- ग्लेशियल झील के फटने (GLOF) की भी जांच के दायरे में है। अंतिम कारण सैटेलाइट और मैदानी जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।
चीन सीमा और बिजली परियोजनाओं पर असर
नेपाल-चीन सीमा के केरुंग/ग्यिरोंग क्षेत्र तक बाढ़ का असर दिखा। करीब 42 किलोमीटर सड़क क्षतिग्रस्त और कई पुल बह गए,जिससे महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्ग प्रभावित हुआ। हाइड्रो पावर सेक्टर को भी बड़ा झटका लगा है। लगभग 430 मेगावाट बिजली उत्पादन क्षमता प्रभावित हुई है।
राहत-बचाव अभियान जारी
नेपाल सेना,पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल की टीमें हेलीकॉप्टरों की मदद से बचाव में जुटी हुई हैं। मलबे से बंद रास्ते, क्षति ग्रस्त पुल और खराब मौसम बड़ी चुनौती बने हुए हैं। प्रशासन ने लोगों से नदी किनारे न जाने और सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की है।
हिमालयी क्षेत्र में बढ़ता खतरा
यह घटना हिमालयी क्षेत्रों में ग्लेशियर,ग्लेशियल झीलों और फ्लैश फ्लड के बढ़ते खतरे की ओर फिर से ध्यान खींचती है। विशेषज्ञों का कहना है कि बदलती जलवायु में ऊंचाई वाले अस्थिर क्षेत्रों की निरंतर निगरानी जरूरी है। मृतकों, लापता लोगों और प्रभावित यात्रियों के आंकड़े आधिकारिक पुष्टि के साथ बदल सकते हैं।
