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नाबालिग की सगाई:प्रॉसीडिंग रद्द करने का उच्च न्यायालय का आदेश

जोधपुर, राजस्थान उच्च न्यायालय के न्यायाधीश दिनेश मेहता ने एक सरकारी कर्मचारी के खिलाफ बाल विवाह के मामले में एफआईआर सहित संपूर्ण क्रिमिनल प्रॉसीडिंग को रद्द करने के आदेश जारी किए हैं। इस सरकारी कर्मचारी ने अपने पुत्र की शादी नहीं करके सिर्फ सगाई की थी। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के समक्ष एक सरकारी कर्मचारी को 48 घंटों से ज्यादा जेल भी रहने के साथ अपनी नौकरी से भी हाथ धोना पड़ा था। इसके अलावा इस घटना के बाद आरोपी पिता को लकवा भी मार गया।

मामले के अनुसार ओसियां थानांतर्गत निवासी अनूपसिंह राजपुरोहित ने वर्ष 2020 में अपने पुत्र की सगाई की थी। इसके बाद जोधपुर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के समक्ष एक शिकायत प्रस्तुत हुई। जिसमें शिकायतकर्ता ने अनूप सिंह राजपुरोहित द्वारा अपने पुत्र के बाल विवाह करने की शिकायत दी। जिला विधिक प्राधिकरण द्वारा उक्त शिकायत को ग्रामीण पुलिस अधीक्षक को फॉरवर्ड किया गया जिसके बाद ग्रामीण पुलिस अधीक्षक ने इस शिकायत को ओसियां थानाधिकार में मानते हुए भेजकर जांच के आदेश दिए। इसके बाद ओसियां पुलिस ने अनूपसिंह को शादी नहीं करने हेतु पाबंद किया। साथ ही एफआईआर दर्ज कर आरोपी को 26 जून 2020 को लॉकडाउन के दौरान गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने अपनी चार्जशीट में भी यह लिखा कि आरोपी ने अपने पुत्र की सगाई की थी न कि शादी। इसके बाद आरोपी अनूपसिंह द्वारा राजस्थान हाईकोर्ट में 482 के तहत विविध अपराधी की याचिका अपने अधिवक्ता हरिसिंह राजपुरोहित के मार्फत प्रस्तुत की।

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने न्यायालय को बताया कि आरोपी को चाइल्ड मैरिज एक्ट आरोपी बनाकर चार्जशीट पेश की गई लेकिन उसने अपने पुत्र की शादी नहीं की थी। आरोपी द्वारा केवल मात्र 25 फरवरी 2020 को सगाई की रस्म अदा की गई और पुलिस ने भी अपनी चार्जशीट में यह लिखा है लेकिन लॉकडाउन के चलते त्वरित सुनवाई का मौका नहीं मिला और आरोपी को 48 घंटे से ज्यादा न्यायिक अभिरक्षा में रहना पड़ा। इस कारण उसे शिक्षा विभाग से भी सस्पेंड कर दिया गया। इसके अलावा आरोपी मानसिक क्षति के चलते पैरालाइसिस का शिकार भी हो गया। राजस्थान हाईकोर्ट के न्यायाधीश दिनेश मेहता ने मामले की सुनवाई के बाद इस संपूर्ण कार्यवाही को अवैध करार देते हुए चाइल्ड मैरिज एक्ट का दुरुपयोग हुए आरोपी को चाइल्ड मैरिज एक्ट का आरोपी नहीं मान एफआईआर सहित संपूर्ण क्रिमिनल प्रोसिडिंग को रद्द करने के आदेश दिए।

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