दिल्ली हाईकोर्ट ने लिक्विडेटेड डैमेज वसूली पर लगाई रोक
- रेलवे और कंपनी के बीच था विवाद
- याचिका में कहा-पहले समझौता की प्रक्रिया अपनाना जरूरी
जोधपुर(दूरदृष्टीन्यूज),दिल्ली हाईकोर्ट ने लिक्विडेटेड डैमेज वसूली पर लगाई रोक। दिल्ली हाईकोर्ट ने नॉर्थ वेस्टर्न रेलवे और निर्माण कंपनी विशाल इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड व यूरो-एशियन कंस्ट्रक्शन कॉर्पोरेशन इवरास्कॉन (जेवी) के बीच चल रहे संविदात्मक विवाद में महत्वपूर्ण अंतरिम राहत प्रदान की है।
जस्टिस अमित शर्मा की अवकाशकालीन पीठ की ओर से पारित आदेश में कहा कि पक्षकार पहले अनुबंध में निर्धारित विवाद समाधान प्रक्रिया का पालन करेंगे और तब तक रेलवे द्वारा प्रस्तावित 47.75 करोड़ रुपए की लिक्विडेटेड डैमेज की कार्रवाई प्रभावी नहीं होगी। याचिकाकर्ता कंपनी ने मध्यस्थता एवं सुलह अधिनियम,1996 की धारा 9 के तहत याचिका दायर कर रेलवे को बैंक गारंटी भुनाने तथा अन्य दंडात्मक कार्रवाई से रोकने की मांग की थी।
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कंपनी का कहना था कि अनुबंध के तहत विवाद समाधान के लिए पहले सुलह और उसके बाद डिस्प्यूट्स एडजुडिकेशन बोर्ड (डीएबी) की प्रक्रिया अपनाना आवश्यक है। बिना इस प्रक्रिया को पूरा किए रेलवे की कार्रवाई अनुचित होगी। सुनवाई के दौरान रेलवे की ओर से यह तर्क रखा गया कि याचिका समय से पूर्व दायर की गई है,क्योंकि अनुबंध में निर्धारित विवाद समाधान तंत्र अभी पूरा नहीं हुआ है। रेलवे ने यह भी कहा कि डीएबी को विवादों पर निर्णय देने का अधिकार है और पहले उसी मंच का उपयोग किया जाना चाहिए।
कोर्ट ने दिए विवादों के निस्तारण के आदेश
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट के समक्ष सहमति बनी कि विवाद समाधान प्रक्रिया डीएबी के स्तर से आगे बढ़ाई जाए। कोर्ट ने इस सहमति को रिकॉर्ड पर लेते हुए निर्देश दिया कि अनुबंध में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार विवादों का निस्तारण किया जाए और पक्षकार अपने अन्य कानूनी अधिकार सुरक्षित रखेंगे।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि डीएबी द्वारा निर्णय दिए जाने तक रेलवे की ओर से जारी 12 और 13 मई 2026 की उन संचार प्रक्रियाओं पर अमल नहीं किया जाएगा,जिनके तहत लगभग 47.75 करोड़ रुपए की लिक्विडेटेड डैमेज लगाने की बात कही गई थी।
