स्कूल व्याख्याताओं के पदस्थापन पर लगाई रोक
- राजस्थान सिविल सेवा अपील अधिकरण
- माध्यमिक शिक्षा विभाग का मामला
जोधपुर(दूरदृष्टीन्यूज),स्कूल व्याख्याताओं के पदस्थापन पर लगाई रोक। राजस्थान सिविल सेवा अपील अधिकरण जोधपुर ने स्कूल व्याख्याताओं के पदोन्नति पर पदस्थापन से जुड़े अपीलों को अन्तिम रूप से निस्तारित करते हुए निर्देशक माध्यमिक शिक्षा विभाग द्वारा जारी पदस्थापन आदेश 12 मई 2026 पर रोक लगायी है।
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राजस्थान सिविल सेवा अधिकरण जोधपुर ने जोधपुर,सिरोही,बीकानेर जिले की स्कूलों में कार्यरत स्कूल व्याख्याता श्रवण कुमार,कान्ता शर्मा एवं पूर्णिमा पालीवाल के पदस्थापन संबंधित मामलों की अपीलों का निस्तारण करते हुए उनके पदस्थापन आदेश 12 मई 2026 जिसके द्वारा इनका पदस्थापन क्रमश: प्रतापगढ़,बांसवाड़ा, उदयपुर एवं बालोतरा आदि जिलों में किया गया था जिन पर रोक लगाई गई।
पूर्व में सभी अपीलार्थीगण अध्यापक ग्रेड द्वितीय के पद पर कार्यरत थे। इस पद से इनकी पदोन्नति राजस्थान अधिनस्थ शिक्षा सेवा नियम के नियम 33 के तहत स्कूल व्याख्याता के पद पर निदेशक माध्यमिक शिक्षा विभाग द्वारा वर्ष 2024-25 की रिक्तियों के विरूद्ध 18 अप्रैल 2026 को प्रदान की गई। विभाग द्वारा आदेश 20 अपै्रल 2024 से वर्तमान विद्यालय में ही व्याख्याता के पद पर कार्यग्रहण करने का आदेश पारित किया गया। सभी व्याख्याताओं द्वारा 21 अपै्रल 2024 एवं 22 अपै्रल 2026 को व्याख्याता के पद पर कार्यग्रहण कर लिया गया।
सभी पदोन्नति व्याख्याताओं को पदस्थापन के लिए माध्यमिक शिक्षा विभाग द्वारा काउन्सलिंग के माध्यम से पदस्थापन करने की प्रक्रिया अपनाई गई। इसके लिए विभाग द्वारा सभी कर्मचारियों से विकल्प पत्र भरवाये गये ताकि सभी को इच्छित स्थान पर पदस्थापित किया जा सके। इसके लिए सभी कर्मचारियों द्वारा जो विकल्प दिये गये उन विकल्प पत्रों में भरे अनुसार पदस्थापन किया जाना चाहिए था,परन्तु विभाग द्वारा विकल्प पत्रानुसार पदस्थापन नहीं कर अन्यत्र स्थान पर एवं अन्य जिलों में पदस्थापित किया गया।
पदस्थापन करते समय विभाग द्वारा काउन्सलिंग की जो मूल भावना जिसके तहत पारदर्शिता झलकनी चाहिये का उल्लंघन किया गया। विभाग द्वारा पदस्थापन करते समय गृह जिले के रिक्त पदों जहां पर पूर्व में कार्यरत है उन पदों को काउन्सलिंग के समय प्रदर्शित ही नहीं किया गया। इसके साथ ही कुछ कर्मचारियों जो सेवानिवृति के करीब हैं या कुछ कर्मचारी जो गम्भीर बिमारी से ग्रस्ति है या कुछ कर्मचारियों के पति या पत्नी उसी जिले में कार्यरत है,उनके बावजूद आदेश 12 मई 2026 के आदेश से उन्हें दुरूस्थ जिलों में पदस्थापित किया गया।
विभाग द्वारा काउन्सलिंग के समय केवल काउन्सलिंग की औपचारिकता अपनाई गई न कि काउन्सलिंग को व्यवहारिकता प्रदान की एवं कुल रिक्तियों से कम पद प्रदर्शित किये गये जबकि काउन्सलिंग के नियमानुसार जितने पद हैं, उनसे 120 प्रतिशत अधिक पद प्रदर्शित किये जाने चाहिये थे जो विभाग द्वारा प्रदर्शित नहीं किये गये।
विभाग के पदस्थापन आदेश 12 मई 2026 से व्यथित होकर इन्होंने अधिकरण के समक्ष अपने अधिवक्ता प्रमेन्द्र बोहरा के माध्यम से अपीले प्रस्तुत की। अधिकरण के समक्ष इनके अधिवक्ता का यह तर्क था कि इनका पदस्थापन करते वक्त विभाग द्वारा मनमानी पूर्ण रवैया अपनाया गया है। इनके गृह जिले में पद रिक्त होते हुए भी इनको दुरूस्त स्थानों पर पदस्थापित किया गया है,कर्मचारियों की गम्भीर बिमारी को भी नजर अंदाज किया गया, इनके पति पत्नी एक ही जिले में कार्यरत होने के उपरान्त भी अन्य जिलों में इन्हें अन्यत्र जिलों में पदस्थापित किया गया साथ ही रिक्त पदों को प्रदर्शित न करते हुए मजबूरन इन्हें विकल्प पत्रों के विपरित जाकर पदस्थापित किया गया।
इस संदर्भ में राजस्थान उच्च न्यायालय,जोधपुर द्वारा भी कई न्यायिक दृष्टान्तों में यह उल्लेखित किया गया है कि काउन्सलिंग की प्रक्रिया अपनाते समय पारदर्शिता का विशेष ध्यान रखना चाहिए। अपीलार्थीगण के अधिवक्ता के तर्कों से
सहमत होते हुए अधिकरण ने इन अपीलर्थीगण की अपीलों को अन्तिम रूप से निस्तारित करते हुए यह आदेश पारित किया कि सभी अपीलार्थीगण अधिकारी के समक्ष दो सप्ताह में अपनी परिवेदना प्रस्तुत करें एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग को यह निर्देश दिया कि इनके द्वारा प्रस्तुत कि गई परिवेदना प्राप्त होने पर चार सप्ताह में उस पर आख्यात्मक आदेश पारित करें एवं आख्यात्मक आदेश पारित करने तक निर्देशक माध्यमिक शिक्षा विभाग द्वारा जारी पदस्थापन आदेश 12 मई 2026 पर रोक लगाई एवं वर्तमान स्कूल में ही व्याख्याता के पद पर कार्य करवाने का आदेश पारित किया गया।
