राजस्थान हाईकोर्ट के रोस्टर में फिर बदलाव
- जस्टिस फरजंद अली अब एकलपीठ में करेंगे सुनवाई
- कार्यवाहक सीजे भी आज से जयपुर में बैठेंगे
जोधपुर(दूरदृष्टीन्यूज),राजस्थान हाईकोर्ट के रोस्टर में फिर बदलाव। राजस्थान हाईकोर्ट में चल रहे प्रशासनिक और न्यायिक विवाद के बीच रोस्टर को लेकर एक और बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। हाईकोर्ट प्रशासन ने 31 अगस्त से प्रभावी होने वाली अदालतों की बैठकों के लिए रोस्टर में आंशिक बदलाव करते हुए जस्टिस फरजंद अली को अब एकलपीठ में मामलों की सुनवाई का दायित्व सौंप दिया है।
इससे पहले 25 अगस्त को जारी रोस्टर में जस्टिस फरजंद अली को जयपुर पीठ में जस्टिस इन्द्रजीत सिंह के साथ गठित खंडपीठ में दूसरे नंबर के न्यायाधीश के रूप में शामिल किया गया था। इसे लेकर सवाल उठ रहे थे कि एक वरिष्ठ न्यायाधीश को खंडपीठ में जूनियर न्यायाधीश के साथ दूसरे नंबर पर क्यों बैठाया गया है।
अब रविवार के अवकाश के दिन जारी नए आदेश के अनुसार जस्टिस इन्द्रजीत सिंह और जस्टिस संदीप तनेजा की खंडपीठ गठित की गई है, जबकि जस्टिस फरजंद अली को एकलपीठ में महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई सौंपी गई है। जस्टिस फरजंद अली अब पीसी एक्ट से संबंधित जमानत याचिकाओं,एनडीपीएस एक्ट के तहत नियमित और अग्रिम जमानत याचिकाओं के साथ-साथ दौसा और जयपुर महानगर द्वितीय से संबंधित मामलों की सुनवाई करेंगे।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश भी जयपुर पीठ में करेंगे सुनवाई
25 अगस्त को जारी रोस्टर के अनुसार राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजीव प्रकाश शर्मा भी 31 अगस्त से जयपुर पीठ में न्यायिक कार्य करेंगे। रोस्टर के तहत उनका जयपुर पीठ में बैठकर मामलों की सुनवाई का कार्यक्रम तय है।
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गौरतलब है कि 25 अगस्त को नया रोस्टर जारी होने के अगले ही दिन, 26 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस संदीप मेहता द्वारा लिखे गए पत्रों से जुड़ी खबर सामने आई थी। इन पत्रों के सार्वजनिक होने के बाद राजस्थान हाईकोर्ट के प्रशासनिक मामलों और रोस्टर व्यवस्था को लेकर विवाद और चर्चाएं तेज हो गईं। जस्टिस फरजंद अली जोधपुर स्थित राजस्थान हाईकोर्ट की मुख्यपीठ में नियमित रूप से न्यायिक कार्य कर रहे थे।
25 अगस्त के रोस्टर में उन्हें अग्रिम आदेश तक जयपुर पीठ में बैठने के लिए भेजा गया था, जिसके बाद जोधपुर मुख्यपीठ के अधिवक्ताओं के बीच नाराजगी देखने को मिली और अधिवक्ता सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर लगातार अपनी आवाज उठा रहे हैं। ऐसे समय में, जब राजस्थान हाईकोर्ट के प्रशासनिक फैसलों को लेकर पहले से ही सवाल और विवाद जारी हैं, रोस्टर में रविवार को किया गया यह बदलाव बेहद अहम माना जा रहा है।
