बिजली चोरी व दुरूपयोग के प्रकरणों के निस्तारण के लिए एमनेस्टी स्कीम लागू

बिजली चोरी व दुरूपयोग के प्रकरणों के निस्तारण के लिए एमनेस्टी स्कीम लागू

  • जोधपुर डिस्कॉम
  • 31 दिसंबर तक भरे गए सतर्कता जांच प्रतिवेदनों पर 1 अप्रेल से शुरू

जोधपुर, राज्य सरकार द्वारा बिजली चोरी एवं दुरूपयोग के प्रकरणों में लंबे समय तक राशि जमा न करने के कारण लंबित प्रकरणों का निस्तारण करने के लिए एमनेस्टी स्कीम लागू की है।

सतर्कता जांच प्रतिवेदन के लंबित प्रकरणों का होगा निस्तारण

प्रबंध निदेशक प्रमोद टाक ने बताया कि यह योजना 31 दिसंबर 2021 तक भरे गए सतर्कता जांच प्रतिवेदनों पर 1 अप्रेल से लागू हो गई है। इसके तहत 31 दिसंबर 2021 तक बिजली चोरी के लिए भरी गई सतर्कता जांच प्रतिवेदनों पर लगाई गई जुर्माना राशि का निस्तारण के लिए एमनेस्टी योजना लागू की गई है। यह योजना सभी श्रेणी के उपभोक्ताओं के लिए लागू की गई है।

योजना का उद्देश्य उपभोक्ता को मिले अधिक से अधिक लाभ

टाक ने बताया कि योजना के तहत 1 लाख रूपए तक के जुर्माना राशि पर सिविल लाइबिलिट या दुरूपयोग की राशि का 50 प्रतिशत व प्रशमन राशि शत-प्रतिशत भर कर प्रकरण का निस्तारण सहायक अभियंता स्तर पर ही किया जा सकेगा। उन्होने बताया कि 1 लाख रूपए से अधिक की जुर्माना राशि के मामलों में सिविल लाइबिलिट या दुरूपयोग की राशि 50 प्रतिशत के अलावा 1 लाख से अधिक की राशि का 10 प्रतिशत राशि जमा कराने पर छूट का प्रावधान किया गया है। उक्त छूट उपभोक्ता और गैर उपभोक्ता दोनो के लिए लागू होगी। इस संबंध में छूट का अधिक से अधिक लाभ देने के लिए संबंधित उपभोक्ता व गैर उपभोक्ता को नोटिस जारी किये जा रहे हैं। उपभोक्ता स्वयं भी अपने सहायक अभियंता कार्यालय में सम्पर्क कर योजना का लाभ ले सकते हैं।

योजना 1 अप्रेल से 30 सितंबर तक

प्रबंध निदेशक ने बताया कि योजना 1 अप्रेल से 30 सितंबर 2022 तक रहेगी। विद्युत चोरी के मामलों में दर्ज मुकदमों से संबंधित व्यक्ति की ओर से जुर्माना राशि का इस छूट में पैसे जमा कराने के बाद विद्युत चोरी निरोधक थाने में सूचना देकर मुकदमें का निस्तारण किया जा सकेगा।

उपभोक्ता, गैर उपभोक्ता के लिए अलग अलग प्रावधान

इसके अतिरिक्त उपभोक्ता यह राशि 6 किस्तों में भी जमा करने का भी प्रावधान किया गया है, लेकिन गैर उपभोक्ता को एक मुश्त ही राशि जमा करानी होगी। विद्युत चोरी के मामलों में अदालतों में मामला दर्ज कराने वाले व्यक्ति को मुकदमा वापस लेने का शपथ पत्र पेश करने पर उन्हें ही इस योजना का लाभ मिल सकेगा। कोर्ट में चालान प्रस्तुत हो जाने की स्थिति में इस योजना का लाभ नहीं लिया जा सकेगा।

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