पानी के लिए अब भी मची है त्राहि-त्राहि

  • जलदाय विभाग के दावें खोखले
  • लूणी के गांवों से पहुंचे ग्रामीण,कलेक्ट्रेट पर आक्रोशित प्रदर्शन

जोधपुर(दूरदृष्टीन्यूज),पानी के लिए अब भी मची है त्राहि-त्राहि। नहर बंदी समाप्त होने के पंद्रह दिन बाद भी शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल स्थिति में अब तक सुधार नहीं हो पाया है। शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में अब भी पानी के लिए त्राहि-त्राहि मची हुई है। लोगों को अब भी पानी के टैंकर खरीद कर पानी पीने का मजबूर होना पड़ रहा है। जलदाय विभाग कायलाना और तख्त सागर की भराव क्षमता को पूरी तरह बढ़ाने के बाद पेयजल स्थिति में सुधार की आस लगाए बैठा है,मगर आमजन का पेयजल के बिना जीना दुश्वार सा हो गया है। जलदाय विभाग के दावे फिलहाल खोखले साबित हो रहे हैं।

बुधवार को लूणी तहसील के कई गांवों से ग्रामीण सुबह कलेक्ट्रेट पर पहुंचे और आक्रोशित होकर प्रदर्शन करने लगे। लोगों मटकियां फोड़ कर अपना रोष जाहिर किया। बाद में जिला कलेक्टर को एक ज्ञापन भी दिया गया।
ग्रामीणों का नेतृत्व कर रहे गौतम सिंह ने कहा कि क्षेत्र के हजारों ग्रामीण महीनों से पेयजल के लिए परेशान हैं। कई गांवों में नियमित जलापूर्ति नहीं होने से लोगों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 21 एवं 14 का हवाला देते हुए स्वच्छ पेयजल उपलब्ध करवाना राज्य की जिम्मेदारी बताया।

चार मांगे रखीं 
प्रशासन को दिए ज्ञापन में चार प्रमुख मांगें रखी गई हैं। इनमें सभी प्रभावित गांवों के लिए स्थायी पेयजल परियोजना की लिखित कार्ययोजना और समय-सीमा सार्वजनिक करना, स्थायी व्यवस्था होने तक प्रत्येक प्रभावित परिवार को निशुल्क टैंकर जलापूर्ति अथवा प्रतिमाह दो हजार रुपये जल विफलता मुआवजा देना, 24 घंटे डिजिटल हेल्पलाइन एवं टैंकरों की जीपीएस ट्रैकिंग व्यवस्था लागू करना तथा तीसरे पक्ष से भौतिक सत्यापन और ऑडिट करवाना शामिल है।

पेयजल संकट समाधान की मांग 
गौतम सिंह का कहना है कि ग्रामीणों को योजनाओं की प्रगति और जलापूर्ति व्यवस्था की सही जानकारी नहीं मिल पा रही है,जिससे जनाक्रोश बढ़ रहा है। क्षेत्र के ग्रामीणों ने भी प्रशासन से शीघ्र हस्तक्षेप कर पेयजल संकट का स्थायी समाधान सुनिश्चित करना चाहिए।