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ऑलिफ़ तकनीक से किया स्लिप डिस्क का ऑपरेशन

  • 16 अक्टूबर वर्ल्ड स्पाइन डे
  • एसएन मेडिकल कॉलेज के अस्थि रोग चिकित्सकों का नया कीर्तिमान
  • चिकित्सकों का दावा पश्चिमी राजस्थान में पहली बार हुई इस तरह की स्पाइन सर्जरी
  • कमर के बजाय पेट के रास्ते से स्लिप डिस्क का ऑपरेशन
  • ऑपरेशन के बाद कमर दर्द की संभावना न्यूनतम

जोधपुर,ऑलिफ़ तकनीक से किया स्लिप डिस्क का ऑपरेशन। डॉ एसएन मेडिकल कालेज के अस्थि रोग चिकित्सकों ने ऑलिफ़ तकनीक से किया स्लिप डिस्क का ऑपरेशन कर कीर्तिमान स्थापित किया है। रीढ़ की हड्डी अर्थात स्पाइन के ज़्यादातर ऑपरेशन परंपरागत तकनीक से किए जाते हैं जिसमे कमर एवं पीठ के रास्ते से चीरा लगाकर किए जाते हैं, इनमें रीढ़ की हड्डी के आसपास की मास पेशियों एवं हड्डी को काटकर दबी हुई नस तक पहुँचा जाता है फिर नस पर से दबाव हटाया जाता है। इसमें मास पेशियों के कमज़ोर होने,नस के प्रभावित होने का ख़तरा रहता है लेकिन नई तकनीक जिसको ऑलिफ़ (ओब्लीक लम्बर इंटरबोडी फ्यूज़न) कहा गया है,इसमे पेट के रास्ते से एक सूक्ष्म छेद के द्वारा ट्यूब रिट्रेक्टर नामक औज़ार से यह ऑपरेशन किया जाता है,इसमें पेट के रास्ते से रेट्रोपेरिटोनियल कोरिडोर से होते हुए डिस्क तक पहुँचा जाता है,इस ऑपरेशन में रक्त स्राव बहुत ही कम होता है। इस तकनीक की फ्यूज़न रेट ज़्यादा होने से मरिज़ो को बेहतरीन परिणाम मिलते हैं। वरिष्ठ आचार्य डॉ महेश भाटी ने बताया कि रीढ़ की हड्डी की कुछ बीमारियों जैसे व्यस्क स्कॉलियोसिस, ऑस्टियोपोरोसिस,रिवीजन स्पाइन सर्जरी,फ़ोरमिनल स्टेनोसिस ज़ैसे मरीजों के लिये इस तकनीक से अद्भुत परिणाम देखने को मिलते हैं इस तकनीक की फ्यूज़न दर बाक़ी तकनीक से कही ज़्यादा है,भविष्य में अधिकतर ऑपरेशन के इस तकनीक पर आधारित होने की संभावनाएं हैं। पिछले कुछ ही सालो में यह तकनीक देशभर में धीरे-धीरे प्रचलित हो रही है। जोधपुर ही नहीं राजस्थान के किसी भी सरकारी अस्पताल में इस तरह की तकनीक का पहली बार उपयोग कर स्लिप डिस्क का ऑपरेशन किया गया।

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जोधपुर निवासी 45 वर्षीय रेशम कंवर के कमर में असहनीय दर्द के साथ दाहिने पाँव में कूल्हे से एड़ी तक दर्द एवं सूनापन रहता था,इसके लिए स्पाइन सर्जन डॉ महेन्द्र सिंह टाक ने एमआरआई करने पर उनके L3L4 में स्लिप डिस्क की तकलीफ़ बताई साथ ही L3L4 हड्डी में लचक भी पायी गई थी। इसके लिये डॉ टाक ने उनको ऑपरेशन की सलाह दी जिसमे रेट्रोपेरिटोनियल कॉरिडोर से केज एवं परक्यूटेनियस स्क्रू डाले गये,मरीज़ बिलकुल स्वस्थ है एवं उसकी अस्पताल से छुट्टी हो गई है। अस्थि रोग विभागाध्यक्ष डॉ किशोर राय चंदानी ने बताया ऑलिफ़ तकनीक चुनिंदा स्लिप डिस्क मरीजों के इलाज के लिए बहुत ही कारगर है। परंपरागत तकनीक के बजाय इस तकनीक में बेहतर परिणाम मिलते हैं।अस्पताल अधीक्षक डॉ राजश्री बेहरा ने संपूर्ण टीम को बधाई दी। उन्होंने बताया कि ये ऑपरेशन सरकारी योजना के तहत निःशुल्क हुआ है। मेडिकल कॉलेज प्रधानाचार्य डॉ दिलीप कच्छवाह, महात्मा गांधी अस्पताल में रीढ़ की हड्डी के मरिजों के इलाज की स्पाइन सर्जरी की बढ़ती सुविधाओं पर ख़ुशी व्यक्त की है। यह ऑपरेशन वरिष्ठ आचार्य अस्थि रोग डॉ महेश भाटी के मार्गदर्शन में स्पाइन सर्जन डॉ महेंद्र सिंह टाक की टीम ने किया,जिसने डॉ जियालाल डॉ श्रेयस डॉ लक्षित थे। एनेस्थीसिया विभागध्यक्ष डॉ सरिता जनवेज़ा के नेतृत्व में डॉ प्रमिला सोनी,डॉ रश्मि,डॉ पूर्वी,डॉ चेतन ने इस ऑपरेशन को संपन्न कराया।नर्सिंग स्टाफ में इक़बाल कायमखानी,अजीत गुर्नानी मीनाक्षी अग्रवाल,प्रिया,गणपत,वार्डबॉय ज्ञान एवं अकरम का सहयोग रहा।

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