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‘दुश्मन तक के हक में दुआ करते थे,कैसे-कैसे लोग हुआ करते थे’

-राजस्थान साहित्य उत्सव-2023
-‘रात को वक्त दिया जाए गुजरने के लिए,आपकी मर्जी से सूरज तो नहीं निकलेगा’

जोधपुर,कला एवं संस्कृति विभाग की ओर से आयोजित राजस्थान साहित्य उत्सव: साहित्य कुम्भ में रविवार की शाम मुशायरे की शमां जाने माने शायरों के कलाम से रोशन हुई। मुशायरे में शेरो-शायरी की शुरुआत असद अली ’असद’ ने की। उन्होंने फिर ‘आसमां की आंख से टपका है लहू,शायद जमीं पर जुल्म हुआ है किसी के साथ…’ सुनाकर वाह वाही लूटी। इसके बाद मोहम्मद इरशाद ‘अज़ीज’ ने ‘जीना दुश्वार कर लिया होगा, मुझको दिलदार कर लिया होगा,ईद उसने मना ली होगी’, ‘हां.. खुद का दीदार कर लिया होगा…’ सुनाकर समां बांध दिया।

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डॉ.इशराकुल इस्लाम ‘माहिर’ ने ‘जहां हो दिल लगाना उस जगह अक्ल जल्दी में,रहा करती है न जानें क्यों हमारी नस्ल जल्दी में…’ के जरिए श्रोताओं के साथ जुड़ाव बना लिया। शायर बुनियाद ज़हीन ने ‘ये जिंदगी का मुकद्दर हो गया है…’ सुनाया। एएम तुराज ने सुनाया ‘हर लम्हा सफर में हो तो ठहर क्यों नहीं जाते,हमसे भी कोई पूछता घर क्यों नहीं जाते। तुम इश्क अगर हो तुम्हें किस बात का डर है, इस आग के दरिया से गुजर क्यों नहीं जाते।’

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‘दुश्मन तक के हक में दुआ करते थे, कैसे-कैसे लोग हुआ करते थे’, ‘समझाए दादी कैसे पोते को,बस्ती बस्ती पेड़ हुआ करते थे’ जैसी शायरियों के साथ शीनकाफ़ निज़ाम ने अपने अनोखे अंदाज से महफिल का दिल जीत लिया। मुशायरे की सदारत कर रहे वसीम बरेलवी ने अपनी शायरी से श्रोताओं को तालियां बजाने पर मजबूर कर दिया। ‘रात को वक्त दिया जाए गुजरने के लिए,आपकी मर्जी से सूरज तो नहीं निकलेगा’ सरीखी नज़्मों से उन्होंने वाहवाही लूटी।

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वसीम बरेलवी की सदारत में हुए मुशायरे की निज़ामत लोकेश कुमार सिंह ‘साहिल’ ने की। साहिल ने कहा कि मुशायरा तहजीबी सिलसिला होता है। मुशायरा आज भी खाली हाथ घर नहीं जाने देता,सुनने वाले कुछ न कुछ साथ लेकर जाते हैं।शीन काफ़निज़ाम, अंजुम रहबर,हिना तैमूरी,मदन मोहन ‘दानिश’,शकील आज़मी, एएम.तुराज, हबीब कैफ़ी,ज़ाकिर अदीब,मोहम्मद इरशाद ‘अज़ीज’, असद अली ’असद’, बुनियाद ज़हीन,डॉ.निसार राही,डॉ. इशराकुल इस्लाम ‘माहिर’, ब्रजेश अम्बर,आदिल रजा मंसूरी,गुलाम मोहिउद्दीन ‘माहिर’,डॉ.अरशद अब्दुल हमीद ने अपने कलाम पेश किए। कला एवं संस्कृति मंत्री डॉ.बीडी कल्ला ने भी मुशायरे में शिरकत की। इस अवसर पर रमेश बोराणा, बिनाका मालू, दिव्या मदेरणा, अभिनेत्री व गायिका इला अरुण भी मौजूद थे।

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